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हैल्थ अपडेट: जानिए, कैसी हो महिलाओं की डाइट

Mon, 03 Mar 2014 02:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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अगर महिला हैल्दी है तो पूरी फैमिली भी हैल्दी रहेगी। डाइटीशियन्स का मानना है कि महिलाएं अपने परिवार के खाने पर जितना ध्यान देती हैं उसके विपरीत वे अपनी डाइट को लेकर लापरवाह रहती हैं।
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इस वजह से उम्र बढ़ने के साथ शरीर पर असर दिखने लगता है। आठ मार्च को वीमेन डे है। इस महत्वपूर्ण दिन को ध्यान में रखकर अमर उजाला वीमेन न्यूट्रीशियन पर अपने पाठकों को विस्तृत जानकारी दे रहा है।

किस उम्र में कैसी डाइट

बचपन
-छह महीने तक बच्ची को सिर्फ मां का दूध पिलाएं।
-छह महीने से डेढ़ साल तक  मां के दूध के अलावा, साफ्ट फूड, दालें, रोटी और जो घर में बन रहा हो। बोतल से दूध न पिलाएं। साफ्ट ड्रिंक और शेक न दें।

किशोर अवस्था
13 वें साल में प्रवेश करते ही पीरियड आने लगते हैं। डाइट में कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन की मात्रा बढ़ानी होगी। डाइट में सोयाबीन, बीन्स, पत्तेवाली सब्जी और दूध से बने व्यंजन को शामिल करना करना होगा। यदि इस उम्र में खानपान में ढिलाई बरती गई तो आगे दिक्कत आ सकती है। 20 की उम्र में आयरन की कमी से एनिमिया हो सकता है।

वर्किंग वूमेन की डाइट

बीस की उम्र के बाद खान-पान जरूरत के मुताबिक बदलता है। कामकाजी महिलाओं को आफिस में एक सीट पर लगातार बैठे रहना, स्ट्रेस भरा वर्क कल्चर, कंपटीशन की भावना रहती है। वर्किंग वुमेन की डायट में विटामिन , जिंक , प्रोटीन और कैल्शियम का होना जरूरी है।

दिन की शुरुआत दूध, दलिया, कॉर्नफ्लेक्स और मल्टी ग्रेन ब्रेड से करें। साथ में एक फ्रूट जरूर लें। सेब, पपीता व आडू़ में विटामिन एक की मात्रा अधिक होती है। मानसिक तौर पर मजबूती के लिए ड्राई फ्रूट जरूर लें। लंच में जिंक की मात्रा अधिक होनी चाहिए।

पालक या ब्रोकली जैसी हरी सब्जियों को शामिल करें। गेहूं की रोटी या एलर्जी है तो बेसन का प्रयोग कर सकते हैं। दाल, हरी सब्जी, रोटी के साथ भुजिया और खूब सारा सलाद रखें।

शाम के वक्त एक चाय व उसके साथ बिस्कुट ले सकते हैं। मट्ठी व तले स्नेक्स से दूर रहें। रात को लाइट फूड लें। परांठे की जगह रोटी और कम मसाले वाली सब्जी खाएं। पोहा, चीला, सलाद प कार्नप्लेक्स भी खा सकती हैं। सब्जियों का बना सूप फायदेमंद रहेगा।

प्रेग्नेंसी के समय डाइट

प्रेग्नेंसी टाइम में विटामिन ए, आयरन, कैल्शियम और प्रोट्रीन की ज्यादा जरूरत होती है। दिन की शुरुआत फल से करें। उसके बाद दलिया लें। इसमें किशमिश और बादाम मिक्स कर सकते हैं। दिन में सूप, दाल, चपाती, चावल, सलाद, सब्जी, दही शामिल करें। हर दो घंटे में कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। पपीता का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

रात का खाना हलका होना चाहिए। पानी खूब पीना चाहिए। बैंगन, मिर्च, मटर, कोल्ड ड्रिंक्स से परहेज करें। मटन, कोको, चिकन, एग, अल्कोहल, स्मोकिंग, पेन मसाला टी, कॉफी और आइसक्त्रस्ीम वगैरह कम से कम लें।

प्रेग्नेंसी के बाद
प्रेग्नेंसी के बाद आमतौर पर वजन बढ़ जाता है। ऐसे में उन्हें फैट फ्री व गुड कोलेस्ट्राल की चीजें ज्यादा लेनी पड़ेंगी। सलाद की मात्रा बढ़ानी होगी। शुगर की मात्रा कम करनी होगी। आलू, चावल व मैदा से बनी चीजों की मात्रा भी घटानी होगी।

ये रुटीन में ये अपनाएं

-ब्रेकफास्ट कभी न छोड़े।
-खाली पेट सुबह सीधे चाय न पीएं। ब्लैक टी, स्किम्ड मिल्क या फिर ग्रीन टी लें।
- ब्रेकफास्ट और लंच के बीच कम से कम तीन घंटे का अंतर हो।
-यदि दूध पसंद नहीं हैं तो दही लें।
-डिनर में लाइट फूड लें। खाने से पहले सूप पीएं ।
-एक-दो घंटे के गैप में कुछ ना कुछ हल्का-फुल्का लें। ताकि गैस बनने की प्रॉब्लम न आए।
-भोजन में रोजाना आंवला शामिल करें।
-रोजाना 40 मिनट की एक्सरसाइज जरूर करें।
-पानी की मात्रा इतनी रखनी चाहिए कि हर तीन घंटे में यूरीन आए।

ताकत के मंत्र

कैल्शियम : यह हमारी हड्डियों को मजबूत बनाता है। जब कैल्शियम की कमी हो जाती है तो हमारा शरीर हड्डियों से कैल्शियम लेने लगता है। इससे हड्डियां कमजोर होती हैं और आस्ट्रियोप्रोरोसिस होने के चांस बढ़ जाते हैं। कैल्शियम के लिए फैट फ्री दूध, पत्तेवाली सब्जियां, तिल, दही, पनीर लें।

आयरन : आयरन दिमाग को मजबूत और खून की मात्रा बढ़ाता है। आयरन की कमी से एनिमिया होने का खतरा रहता है। ज्यादा कमी उम्र बढ़ने के साथ खतरा पैदा कर सकती हैं। आयरन के लिए साबुत अनाज, मेथी, चिड़वा, सोयाबीन, आंवला और हरी सब्जियां लें।

विटामिन सी : कैल्शियम और आयरन लिया जाता है तो उसे शरीर के अंदर ग्रहण करने के लिए विटामिन की जरूरत पड़ती है। विटामिन सी के लिए आप नीबू ले सकते हैं। नीबू की शिकंजी, दाल में नीबू डाल सकते हैं या फिर पानी में भी नीबू लें।

सोयाबीन : सोयाबीन ताकत का सबसे बड़ा स्रोत है। रजोनिवृत्ति (मीनोपोज) के दौरान इसका प्रयोग महिलाओं को फायदा पहुंचाता है। यह एक शोध में भी सामने आ चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके सेवन से महिलाओं को रक्त स्राव के दौरान गर्मी महसूस होने की शिकायत नहीं होती है। सोयाबीन के सेवन से रजोनिवृत्ति के दौर से गुजर रही महिलाओं को बेहद कम तकलीफ होती है।
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क्या कहती हैं महिला विशेषज्ञ

महिलाओं का अपनी डाइट पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं रहता है। इससे उन्हें मानसिक व शारीरिक तौर पर काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। उन्हें अपनी डाइट में कैल्शियम, विटामिन और आयरन शामिल करना होगा। तभी वे पूरी तरह से स्वस्थ्य बन पाएंगी।
-डा. मंजू अरोड़ा, चीफ डाइटिशियन (आरडी) जीएमसीएच 32

डाइट का मतलब यह नहीं कि खूब खाएं। डाइट में सभी पोषक तत्वों की मात्रा जरूरत के मुताबिक होनी चाहिए। हरी पत्तों की सब्जियां व फैट फ्री दूध की चीजे जरूर रोज की डाइट में शामिल करें।
-सुनीता मल्होत्रा, डाइटिशियन, पीजीआई चंडीगढ़

फास्ट फूड को छोड़कर सबकुछ अपने खाने में शामिल करें। वार्किंग वूमेन व प्रेग्नेंसी के दौरान डाइट पर ज्यादा ध्यान देना होगा। 35 के बाद फैट से बढ़ाने वाली चीजों से दूर होना चाहिए।
-डा. अंजू, हेड आफ डिपार्टमेंट गायनकोलॉजी जीएमसीएच 32
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