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एचसीएस परीक्षा का मामला ट्रिब्यूनल को ट्रांसफर किए जाने से खफा अभ्यर्थी, अब करेंगे विरोध प्रदर्शन

Tue, 30 Jul 2019 09:37 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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हरियाणा में एचसीएस परीक्षा संबंधी मामला भी हाईकोर्ट से अब हरियाणा एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (हैट) को ट्रांसफर होने से अभ्यर्थी खफा हो गए हैं। उन्होंने मांग की है कि उनका केस हाईकोर्ट में ही चलना चाहिए, क्योंकि हाईकोर्ट ने उनके केस में 23 जुलाई को फैसला रिजर्व कर दिया था। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस तरह  के ट्रिब्यूनल सर्विस के बाद के मैटर से संबंधित होते हैं, लेकिन वे तो अभी सरकार  के कर्मचारी ही नहीं है, तो उनका मैटर हैट में क्यों ट्रांसफर किया जा रहा है।
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हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता व मूवमेंट को लीड करने वाली अभ्यर्थी श्वेता ढुल ने बताया कि एचसीएस (एग्जीक्यूटिव ब्रांच) की यह परीक्षा 31 मार्च को हुए थे, जिसमें ढेरों त्रुटियों थी। परीक्षा में कुछ प्रश्न तो गलत थे। जबकि 15 प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस थे। जबकि 15 प्रश्न ऐसे थे जो 2008 में के सैंपल पेपर से हुबहू कॉपी थी। कुछ प्रश्न विदाउट ट्रांसलेशन के थे, जो नियमों के विरूद्ध है। इसके अलावा परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग थी। इसके बावजूद एचपीएससी ने इस परीक्षा का रिजल्ट परसेंटाइल बेसिस पर निकाल दिया। जिससे मैरिट में ही गफलत हो गई।

याचीकर्ता ने बताया कि इसके अलावा एचपीएससी ने इस परीक्षा का रिजल्ट कुल 166 पदों का 12 गुना बेस के आधार पर घोषित करना था। लेकिन अंतिम चयन अभ्यार्थियों में 216 अभ्यर्थी अतिरिक्त चुने गए। साथ ही स्पोर्ट्स कोटे के अभ्यर्थियों के चयन में भी मनमानी की गई। याचीकर्ता ने कहा कि हमें हाईकोर्ट से बहुत ज्यादा उम्मीद थी और केस भी अंतिम चरण में था। मगर अब ये केस हैट में ट्रांसफर होने केबाद लंबा लटक जाएगा। जिससे सभी अभ्यर्थी खासे नाराज है।  उन्होंने बताया कि इसी के चलते 3 अगस्त को कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में ‘युवा हल्ला बोल’ मंच के बैनर तले अभ्यर्थी प्रदर्शन करेंगे और अपनी डिग्रियां जलाएंगें।
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उधर, महासंघ ने भी किया विरोध किया

हरियाणा कर्मचारी महासंघ ने भी ‘हैट’ गठित करने पर प्रांतीय महासचिव वीरेंद्र सिंह धनखड़ ने कहा कि जब हमारे देश में उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय सवेंधानिक सबसे बड़ी शक्ति है। वहां जाने पर सरकारों द्वारा पीड़ित कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलती है। तो इस ट्रिब्यूनल की क्या जरूरत है।

प्रांतीय महासचिव ने कहा कि चंडीगढ़ उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं द्वारा ट्रिब्यूनल के नोटिफिकेशन जारी होने के तुरंत बाद सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए वर्क सस्पेंड करके सराहनीय कार्य किया है। वीरेन्द्र सिंह धनखड़ ने हरियाणा सरकार से हिमाचल प्रदेश सरकार की अनुशंसा के आधार पर  इसे केंद्र सरकार के कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग को पुन: भेजकर वीरवार को जारी हुए नोटिफिकेशन को भंग करने की मांग की।
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