अभी प्रदेश सरकार फिलहाल पंजाब पुलिस नियम 1934 के तहत काम कर रही है। इन नियमों में भी बदलाव पर विचार चल रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने अपने यहां 1999 में मकोका बना दिया था, जबकि दिल्ली सरकार 2002 में इस तरह का कानून बना चुकी है। जिसमें सट्टेबाजों और सूदखोरों पर कड़ी कार्रवाई का भी प्रावधान है।
प्रस्तावित कानून हकोका का ये होगा प्रारूप
-एक्ट के तहत किसी भी अपराधी के खिलाफ तभी मामला दर्ज होगा, जब वह अंतिम दस वर्षों के भीतर कम से कम दो संगठित अपराधों में संलिप्त पाया जाए और इस अपराध में एक से अधिक व्यक्ति शामिल हों। आरोपी के खिलाफ एफआईआर के बाद चार्जशीट भी दाखिल करना जरूरी है। इस कानून में अगर पुलिस 180 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं करती तो आरोपी को जमानत मिल सकती है।
पुलिस को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दायर करने का अधिक समय मिलेगा। आईपीसी में 60 से 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दायर करनी जरूरी होती है। अगर किसी आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाता है तो उसे अधिकतम 15 दिनों तक पुलिस रिमांड मिल सकता है, प्रस्तावित हकोका में पुलिस रिमांड की अवधि 30 दिनों तक हो सकती है। प्रस्तावित हकोका में कम से कम पांच वर्ष की सजा तथा फांसी की सजा का भी प्रावधान रखा जा सकता है।
सीएम ने बताया कि नशे से युवाओं को दूर रखने के लिए हरियाणा 3ई पर काम कर रहा है। जिसमें इंफोर्समेंट, एजुकेशन और इंटरटेनमेंट ऑफ सिविल सोसायटी शामिल है। मादक पदार्थों के अंकित अभियोगों के अनुसंधान के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए हरियाणा पुलिस अकादमी, मधुबन में प्रशिक्षण कोर्स चलाए जा रहे हैं।
बड़े-बड़े अपराधी नशीले पदार्थों की बड़ी खेप के साथ पकड़े जाते हैं उनकी पूछताछ रिपोर्ट का रिकॉर्ड रखा जाए। इन रिपोर्ट से ड्रग नेटवर्क व गैंग के लिए वित्त व्यवस्था करने वालों की जानकारी हासिल करने में सहायता मिलेगी। इसकी एक प्रति अंतरराज्यीय ड्रग सचिवालय को भेजने का आग्रह सभी उत्तरी राज्यों से किया गया है।
हरियाणा मोहल्ले के स्थानीय लोगों से नशे का प्रयोग करने वाले और नशा उपलब्ध करवाने वालों की जानकारी प्राप्त करने के लिए जिला व खंड स्तर पर विशेष टास्क फोर्स का गठन जल्दी करेगा। मादक पदार्थों की अवैध तस्करी व बिक्री में शामिल व्यक्तियों के गैंग को खत्म करने के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों को अपनाएंगे। -मनोहर लाल, सीएम, हरियाणा