पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कोविड काल के दौरान लोगों पर नियमों के उल्लंघन को लेकर दर्ज मामलों में हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ की अदालतों में चल रहे ट्रायल पर रोक लगा दी है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट वर्तमान व पूर्व सांसदों/विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों को जल्द निपटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लिए गए संज्ञान मामले में सुनवाई कर रहा है। इस मामले में पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट को बताया गया था कि माननीयों के खिलाफ लंबित मामलों में बड़ी संख्या में केस ऐसे हैं जो बहुत छोटे हैं और कुछ तो धारा 144 के उल्लंघन के हैं।
हाईकोर्ट ने इस मामले में दायरा बढ़ाते हुए कोरोना काल के दौरान नियमों के उल्लंघन से जुड़े सभी मामलों का ब्योरा सौंपने का हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ प्रशासन को आदेश दिया था।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने बताया कि राज्य में करीब 18000 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से 5792 केस लंबित हैं और करीब 12000 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। हरियाणा सरकार ने बताया कि राज्य में करीब 9 हजार मामले दर्ज किए गए थे और जिनमें 4494 पेंडिंग हैं। चंडीगढ़ प्रशासन ने बताया कि कुल 1142 केस दर्ज किए गए थे और 114 केस अभी लंबित हैं।
इस ब्योरे को देखने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान तब ऐसे हालात थे कि लोगों को बचाने के लिए नियमों को सख्ती से लागू किया गया था। लोग बड़े पैमाने पर आदेशों का पालन कर रहे थे लेकिन ऐसी आकस्मिक स्थितियां हो सकती थीं, जिसने उन्हें भोजन, दवा आदि की आवश्यकता पूरी करने के लिए आदेश का उल्लंघन करते हुए अपने घरों से बाहर निकलने के लिए मजबूर किया होगा।
अब हालात बदल चुके हैं ऐसे में अब इन केसों को और लंबा खींचे जाने की जरूरत नहीं। उस दौरान दर्ज किए यह हजारों केस अदालत में लंबित हैं और अदालतों पर इन केसों का भारी बोझ है, इसलिए इन केसों का निपटारा करना जरूरी है। ऐसे में हाईकोर्ट ने इन सभी मामलों में ट्रायल पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को ऐसे मामलों को अलग करने का आदेश दिया है। इनमें आईपीसी की धारा 188, डीएमए की धारा 57 और महामारी अधिनियम की धारा 3 के उल्लंघन के अतिरिक्त अन्य धाराओं को भी जोड़ा गया हो ताकि उन्हें अलग से सुनवाई के लिए रखा जा सके।