वहीं अभिभावकों की ओर से एडवोकेट चरणपाल सिंह बागड़ी ने दलील दी कि लॉकडाउन से सबसे अधिक प्रभावित अभिभावक हुए हैं, ऐसे में सिंगल बेंच ने अभिभावकों को कोई भी राहत दिए बिना सिर्फ निजी स्कूलों के हक में अपना फैसला सुना दिया जो सही नहीं है, क्योंकि लॉकडाउन से लाखों अभिभावकों की आय प्रभावित हुई है। कई का रोजगार चला गया या वेतन में कटौती हो गई है और कई को व्यवसाय में नुकसान उठाना पड़ा है, ऐसे में अभिभावकों को राहत दी जानी बेहद जरुरी है।
यह थे सिंगल बेंच के आदेश
सिंगल बेंच ने 30 जून को निजी स्कूलों की याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए उन्हें एडमिशन और ट्यूशन फीस वसूले की इजाजत दे दी थी फिर चाहे किसी स्कूल ने लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन क्लास की सुविधा दी है या नहीं। सभी स्कूल इस दौरान की ट्यूशन फीस अभिभावकों से वसूल सकते हैं।
सिंगल बेंच ने सभी निजी स्कूलों को इस वर्ष किसी भी किस्म की फीस बढ़ोतरी नहीं करने के आदेश दिए थे। स्कूल जो फीस 2019-20 में छात्रों से लेते थे, वही फीस ही इस वर्ष वसूल पाएंगे। अभिभावक के बारे में आदेश दिए थे कि जो अभिभावक फिलहाल लॉकडाउन के कारण खराब आर्थिक स्थिति में हैं और फीस नहीं दे सकते, वह इसके बारे में स्कूल को अर्जी देंगे और निजी स्कूलों को कहा था कि अगर उनके पास ऐसी अर्जी आती है तो वे इस पर संवेदनशीलता से गौर कर निर्णय लें। चाहे तो फीस माफ की जा सकती है या बाद में ली जा सकती है।