इस मामले में हाईकोर्ट को सहयोग दे रहे सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने कहा कि सरकार द्वारा डेरा प्रेमियों के सामने समर्पण के कारण ही पंचकूला को तोड़फोड़, आगजनी और हिंसा का सामना करना पड़ा। डेरा प्रेमी सरकार से अपनी किसी मांग को लेकर नहीं, बल्कि न्यायपालिका पर दबाव बनाने के लिए जुटे थे। इन दंगों में हुई सरकारी और निजी संपत्ति के नुकसान की भरपाई किससे की जाए, हाईकोर्ट अब इस मुद्दे पर सभी पक्षों की दलीलें सुन रहा है।
दंगे राज्य सरकार की नाकामी, वह जिम्मेदारी से बच नहीं सकती
अनुपम गुप्ता ने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार की नाकामी ही सामने आई है। इसलिए दंगों के दौरान हुए नुकसान के लिए राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। एडवोकेट एमएस जोशी ने सुनवाई शुरू होते ही कहा कि पंचकूला में हुए दंगे डेरामुखी के इशारे पर हुए थे। अब तो इसके कई सबूत भी सामने आ चुके हैं।
ऐसे में इन दंगों को लेकर पंचकूला में जितनी भी एफआईआर दर्ज की गई हैं, उन सभी में डेरामुखी को भी नामजद किया जाए। इस पर हाईकोर्ट ने एडवोकेट मोहिंदर जोशी को कहा कि तुसी इस केस न मुक्कन नहीं देना। इतना कहने के बाद हाईकोर्ट ने अनुपम गुप्ता को अपना पक्ष रहने के लिए कह दिया।