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हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा- जब धारा 144 लगी थी तो पंचकूला में कैसे जमा हुए हजारों डेरा प्रेमी

Tue, 04 Feb 2020 09:18 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो
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साध्वी यौन शोषण मामले में डेरामुखी को दोषी करार देने के बाद पंचकूला में हुए दंगों के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा कि जब धारा-144 लागू थी तो कैसे तीन दिन में हजारों लोग सड़कों पर जमा हो गए। कोर्ट ने कहा कि इसका मतलब साफ है कि धारा-144 को लागू करने में सरकार पूरी तरह से नाकाम रही। 

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जस्टिस राजीव शर्मा, जस्टिस आरके जैन व जस्टिस एजी मसीह की फुल बेंच ने कहा कि एक ओर सरकार कह रही है कि लोग शांतिपूर्वक एकत्रित हुए और इनके भोजन की व्यवस्था की गई ताकि वे शांति से बैठे रहें और दूसरी ओर सरकार ने धारा 144 लगा दी। कोर्ट ने पूछा कि लोग शांतिपूर्वक बैठे थे तो धारा 144 लगाने की जरूरत क्या थी और अगर यह लगाई गई तो इसे सख्ती से लागू क्यों नहीं किया गया। 

इस पर हरियाणा के एडवोकेट जनरल बीआर महाजन ने कहा कि लोगों की संख्या बहुत अधिक होने के चलते एहतियातन धारा 144 लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि जैसे ही भीड़ उग्र हुई, इस पर तत्काल काबू पा लिया गया। महाजन ने कहा कि इन्हें खाना सरकार ने दिया, यह आरोप पूरी तरह से गलत है। इन्हें खाना डेरे की ओर से दिया गया था।

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सरकार के समर्पण के चलते ही पंचकूला में हुई हिंसा 

इस मामले में हाईकोर्ट को सहयोग दे रहे सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने कहा कि सरकार द्वारा डेरा प्रेमियों के सामने समर्पण के कारण ही पंचकूला को तोड़फोड़, आगजनी और हिंसा का सामना करना पड़ा। डेरा प्रेमी सरकार से अपनी किसी मांग को लेकर नहीं, बल्कि न्यायपालिका पर दबाव बनाने के लिए जुटे थे। इन दंगों में हुई सरकारी और निजी संपत्ति के नुकसान की भरपाई किससे की जाए, हाईकोर्ट अब इस मुद्दे पर सभी पक्षों की दलीलें सुन रहा है। 

दंगे राज्य सरकार की नाकामी, वह जिम्मेदारी से बच नहीं सकती 
अनुपम गुप्ता ने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार की नाकामी ही सामने आई है। इसलिए दंगों के दौरान हुए नुकसान के लिए राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। एडवोकेट एमएस जोशी ने सुनवाई शुरू होते ही कहा कि पंचकूला में हुए दंगे डेरामुखी के इशारे पर हुए थे। अब तो इसके कई सबूत भी सामने आ चुके हैं।

ऐसे में इन दंगों को लेकर पंचकूला में जितनी भी एफआईआर दर्ज की गई हैं, उन सभी में डेरामुखी को भी नामजद किया जाए। इस पर हाईकोर्ट ने एडवोकेट मोहिंदर जोशी को कहा कि तुसी इस केस न मुक्कन नहीं देना। इतना कहने के बाद हाईकोर्ट ने अनुपम गुप्ता को अपना पक्ष रहने के लिए कह दिया।   
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