फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Highcourt: सुसाइड नोट पर नाम होना ही आत्महत्या के लिए उकसाने का आधार नहीं, आरोपी पत्नी को अग्रिम जमानत

Tue, 11 Mar 2025 09:21 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

दंपती की शादी 2019 में खन्ना में हुई थी और उनके दो बच्चे भी हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 03 जुलाई 2024 को सूचना मिली कि युवक खन्ना के पास कार में जहरीली दवा खाने के बाद बेहोशी की हालत में मिला था, जिसे बाद में मृत करार दे दिया गया। 
विज्ञापन
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पति को आत्महत्या के लिए उकसाने की आरोपी पत्नी को अग्रिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि सुसाइड नोट में हाल के दिनों में किसी गंभीर झगड़े का उल्लेख नहीं है और केवल सुसाइड नोट में नाम होने के अकेले आधार पर उसे दोषी नहीं करार दिया जा सकता।

विज्ञापन


दंपती की शादी 2019 में खन्ना में हुई थी और उनके दो बच्चे भी हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 03 जुलाई 2024 को सूचना मिली कि युवक खन्ना के पास कार में जहरीली दवा खाने के बाद बेहोशी की हालत में मिला था, जिसे बाद में मृत करार दे दिया गया।

चार जुलाई को शिकायतकर्ता, याचिकाकर्ता-पत्नी और अन्य रिश्तेदारों के साथ खन्ना पहुंचे। एफआईआर में शिकायतकर्ता ने यह भी दर्ज करवाया कि उसके बेटे ने अपने मोबाइल से एक संदेश टाइप किया था, जिसमें लिखा था कि मैं यह पूरी चेतना के साथ लिख रहा हूं, मैं सोनिका से परेशान हूं। उसकी पांच साल से एक ही इच्छा थी कि मैं अपनी मां को किसी वृद्धाश्रम में भेज दूं। मैं उसे एक बात समझाते-समझाते थक गया हूं कि मां की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, लेकिन वह यह बात समझ नहीं रही है...मुझे थोड़ा आराम चाहिए, मैं कार में बैठा हूं, लोकेशन भेज रहा हूं। 
विज्ञापन


न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया कथित सुसाइड नोट के अनुसार मृतक पत्नी की अनुचित इच्छा से परेशान था जो सास-ससुर से अलग रहने पर जोर दे रही थी। हाईकोर्ट ने कहा कि सुसाइड नोट में यह नहीं बताया गया है कि हाल के दिनों में याचिकाकर्ता और उसके बीच कोई गंभीर झगड़ा/झगड़ा हुआ था। प्रस्तुतियों की जांच करने के बाद कोर्ट ने कहा कि आरोपी और मृतक के बीच बातचीत को व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। यह भी जांच की जाएगी कि क्या मृतक ने याचिकाकर्ता के नियमित और निरंतर उकसावे के कारण अपनी जान लेने जैसा कठोर कदम उठाया या यह उसके स्वयं के मानसिक स्वास्थ्य की कमजोरी का परिणाम था। इसके अलावा, दो नाबालिग बच्चे, जिनकी आयु क्रमशः लगभग चार वर्ष और डेढ़ वर्ष है, को स्वाभाविक रूप से अपने दैनिक जीवन में अपनी मां की देखभाल की आवश्यकता होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें