उनके सपने पूरे होने से पहले टूट गए। ऐसी मुश्किल घड़ी में एसिड अटैक पीड़िता नेहा ठाकुर की जिंदगी में उम्मीद का दीया पीजीआई के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने जलाया है। पीजीआई के डॉक्टर पिछले तीन साल से सेक्टर 45 निवासी नेहा ठाकुर के सपनों को पूरा करने में जुटे हैं।
28 नवंबर 2011 की शाम की याद आने पर नेहा के आंखों से आंसू छलक आते हैं लड़खड़ाती आवाज में नेहा कहती हैं कि ऐसे लोगों को सात साल की सजा नहीं, उम्र कैद की सजा मिलनी चाहिए, ताकि जेल से छूटने के बाद दोबारा किसी निर्दोष की जिंदगी वे तबाह न कर सकें। कभी सेल्फ डिपेंडेंट रहने वाली नेहा अब खुद अपने वृद्घ माता- पिता पर निर्भर हैं। उन्हीं की हिम्मत के बदौलत आज नेहा जिंदगी से हर जंग लड़ने को तैयार हैं।
22 वर्षीय नेहा ठाकुर 2011 में एक प्राइवेट कंपनी में सेल्स ऑफिसर पद तैनात थीं। उनके एक कुलीग को हेराफेरी के इल्जाम में नौकरी से निकाल दिया गया था। उसको किसी ने गुमराह कर दिया कि तुम्हारी नौकरी नेहा की वजह से गई है।