फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सांग उत्सव: सांग गोपीचंद में दिखा बेटे के प्रति मां का बेपनाह प्यार

Wed, 15 Jun 2016 01:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
टैगोर थिएटर में आठ दिवसीय सांग उत्सव - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
आठ दिवसीय सांग उत्सव के तहत गोपी चंद के  जीवन पर आधारित कहानी को पेश किया गया। एक मां अपने बेटे से बहुत प्यार करती है और किसी भी कीमत पर उसको खोना नहीं चाहती। इसके लिए वह बेटे को अमर बनाने की तरकीब सोचती है और अंत में उसका बेटा अमर हो जाता है।
विज्ञापन


कुछ ऐसा ही दिखाया गया सांग गोपी चंद में। टैगोर थिएटर में सूचना जन संपर्क व सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा की तरफ चल रहे आठ दिवसीय सांग उत्सव के तहत मंगलवार को गोपी चंद के  जीवन पर आधारित कहानी को पेश किया गया। सांग गोपी चंद को धनपत सिंह ने लिखा हौ और उसका  निर्देशन श्याम लाल ने किया। सांग की कहानी में बताया गया कि धारा नगरी में राजा पृथ्वी पथ का शासन है। उसके बेटे का नाम पदमसेन और पदमसेन के बेटे का नाम गोपी चंद है। गोपी की 16 रानियां व 12 बेटियां है।

एक दिन बड़ी रानी पाटमदेय को सपना आता है कि गोपी बाबा बन गए हैं। रानी सुबह मंत्री को भेजकर गोपी को बुला लेती है और अपना सपना बताती है। लेकिन वह सपने को गलत करार देता है। इसके बाद रानी कहती है आप स्नान कर लो चंदन चौकी बिछी हुई है। फिर गोपी स्नान करने लगता है। गोपी की मां मैनावन्ती छज्जे पर खड़ी उसे देखती है। अपने 36 साल के बेटे का सोने जैसा बदन देख कर वह रोने लगती है क्योंकि उसके पति का इसी उम्र में र्स्वगवास हो गया था। मैनावंती घबरा जाती है और और अपने बेटे गोपी को अमर करने की तरकीब सोचने लगती है ।
विज्ञापन


वह गोपी से वचन ले लेती है। कुछ दिन बाद बाबा गोरखनाथ की जमात आ जाती है। मैनावंती बेटे को जोग दिला देती है। गोरखनाथ व गोपी का मामा भरतरी उसको अपने रंग महल में जाकर रानियों को माता कहकर भिक्षा लाने का वचन ले लेते हैं। गोपी माता कहकर भिक्षा लाता है और मां व गुरुओं के आशीर्वाद से अमर हो जाता है।

कलाकारों ने खुबसूरती से पेश किया 20 के करीब रागिनियों, 5 म्यूजिशियन,5 डांसर व सिंगर दो सूत्रधारों ने इस कहानी को बेहद ही खुबसूरती के साथ पेश किया । 
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें