-केंद्र सरकार के उद्योगाें में बायोमास के प्रयोग करने के निर्देश के बाद लिया फैसला
-गन्ने की मैली या प्रैसमड से बनाई जाएगी सीएनजी, 2024 तक उत्पादन शुरू किए जाने का लक्ष्य
-सरकार के आदेशों से पहले ही बायोमास के ईंधन पर चल रही हैं हरियाणा की शुगर मिलें
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा की शुगर मिलें अब चीनी के साथ-साथ सीएनजी गैस का भी उत्पादन करेंगी। केंद्र सरकार के बायोमास को बतौर ईंधन प्रयोग करने के आदेशों के बाद शुगर फैडरेशन की सलाह पर सीएनजी के उत्पादन का फैसला लिया है। निर्णय अनुसार शुगर मिलों में चीनी उत्पादन के दौरान पैदा होने वाले बायोप्रोडक्ट मैली अथवा प्रैसमड से यह सीएनजी बनाई जाएगी। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। एक मिल में सीएनजी उत्पादन प्लांट लगाने पर करीब 20 करोड़ रुपये की राशि खर्च आएगी।
विदित रहे कि केंद्र सरकार ने हरियाणा के उद्योगों में धीरे-धीरे बायोमास को बतौर ईंधन प्रयोग करने के लिए कहा है, ताकि कोयले पर निर्भरता घट सके और कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन कम किया जा सके। हालांकि हरियाणा की शुगर मिलें पहले ही बायोमास से चलती हैं। यहां गन्ने के अवशेष को ही बतौर ईंधन प्रयोग किया जाता है। इसके बावजूद सरकार के निर्देशों के बावजूद शुगर मिलों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए सीएनजी उत्पादन का फैसला लिया। फैसले अनुसार 10 शुगर मिलों में सीबीजी यानि कंप्रैस बायोगैस का उत्पादन किया जाएगा। गैस उत्पादन के लिए ईंधन मिलों से ही प्रयोग होगा।
आठ मिलों में पेट्रोल पंप पर वाहनों के लिए तो दो मिलों में दूसरे प्रयोग के लिए होगी बिक्री
मिलों में उत्पादित सीएनजी गैस को दस मिलों में से आठ में लगाए गए पेट्रोल पंपों पर वाहनों के लिए बेचा जाएगा। साथ ही दो मिलों में उत्पादित गैस को दूसरे उद्योगों या अन्य प्रयोगों के लिए बेचा जाएगा। जिससे मिलों की आमदनी का एक स्थायी जरिया हो जाएगा। साथ ही मिलों में रोजगार भी बढ़ेगा।
एक दिन में एक मिल पांच टन तक का कर सकेगी उत्पादन
हरियाणा शुगर फैडरेशन में उप-तकनीकी सलाहकार यशवीर कादियान के अनुसार दस मिलों में सीएनजी उत्पादन प्लांट लगाने का फैसला लिया है। यह अभी टेंडर प्रक्रिया में है। इसके लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। वर्ष 2024 तक गैस के उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। एक मिल में एक दिन में करीब पांच टन सीएनजी का उत्पादन हो सकेगा। ये उत्पादन इकाइयां पीपीपी मोड पर स्थापित की जाएंगी।