हाईकोर्ट ने सुरक्षा को लेकर हर सप्ताह समीक्षा रिपोर्ट दाखिल करने के दिए आदेश
पंजाब पुलिस की प्रतिष्ठा वाली टिप्पणी आदेशों से हटाई, तटस्थ पुलिस बल की तैनाती सोचा समझा फैसला
चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने सुरक्षा उल्लंघन की घटनाओं पर दर्ज एफआईआर में जांच करने के लिए यूटी चंडीगढ़ और हरियाणा से जांच के लिए अधिकारियों के नाम मांगे थे। हरियाणा सरकार ने आईपीएस मनीष चौधरी का नाम दिया था, जिनके नाम पर कोर्ट ने सहमति देते हुए उन्हें जांच सौंप दी है। बेंच ने मनीष चौधरी को रजिस्ट्री में एक साप्ताहिक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें जांच के चरण और प्रगति को दर्शाया गया हो।
22 सितंबर को एक व्यक्ति ने अमृतसर के श्री हरिमंदिर साहिब के पास हाईकोर्ट के न्यायाधीश के निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) की बंदूक निकाल ली थी। वह न्यायाधीश को नुकसान पहुंचाने के संभावित इरादे से श्री हरिमंदिर साहिब के प्रवेश द्वार की ओर भागा। पीएसओ ने उसकी मंशा को विफल कर दिया और उसके बाद हुई हाथापाई में बदमाश ने खुद को सिर में गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी।
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल की बेंच ने कहा कि कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला था कि पंजाब पुलिस की ओर से निश्चित रूप से सुरक्षा में चूक हुई है, लेकिन इस न्यायालय का पंजाब के पुलिस कर्मियों की प्रतिष्ठा या ईमानदारी पर संदेह जताने का कोई इरादा नहीं था। बेंच ने स्पष्ट किया कि जज की सुरक्षा के लिए 27 सितंबर को तैनात पुलिसकर्मियों को पंजाब पुलिस से हटाकर तटस्थ पुलिस बल (यूटी प्रशासन/हरियाणा राज्य) में बदलने के निर्देश पूरी तरह से खतरे को ध्यान में रखते हुए जारी किए थे। इससे पहले हाईकोर्ट ने एक अक्तूबर को पारित आदेश में पंजाब पुलिस पर की गई टिप्पणियों को हटा दिया था।