कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीतकर देश का नाम रोशन कर चुके हैं, लेकिन खिलाड़ी आज भी ईनाम के लिए धक्के खा रहे हैं। सरकार का खिलाड़ियों के मेडल जीतने पर नकद इनाम देने का दावा हवाई साबित हो रहा है। प्रदेश में ऐसी कई खिलाड़ी हैं जो वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद सरकार की अनदेखी के कारण नकद इनाम को तरस रही हैं।
भिवानी की बाक्सरों ने जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो गोल्ड और एक सिल्वर जीता है, लेकिन उन्हें आज तक इनाम नहीं मिला। वहीं, सीनियर नेशनल चैंपियन और आल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियन बाक्सर भी नकद इनामी राशि पाने को जूझ रही हैं। चैंपियन बनने के एक साल बाद भी सरकार ने उनसे इनामी राशि देने के लिए आवेदन तक नहीं मांगे हैं। सभी महिला बाक्सरों ने सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं।
भिवानी के गोठरा गांव की सविता ने साल 2015 में चीन में हुई जूनियर वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में 50 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। सविता के ही गांव की सोनिया ने 48 किलो में रजत पदक जीता था। भिवानी के धनाना की साक्षी ने 54 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। यह सभी इस समय साई की नेशनल एकेडमी में प्रैक्टिस कर रही हैं और उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।