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वर्ल्ड चैंपियन बॉक्सर, गोल्ड तो जीत लाईं पर 'धक्के' खिला रही सरकार

Wed, 05 Oct 2016 09:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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बॉक्सिंग
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कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीतकर देश का नाम रोशन कर चुके हैं, लेकिन खिलाड़ी आज भी ईनाम के लिए धक्के खा रहे हैं। सरकार का खिलाड़ियों के मेडल जीतने पर नकद इनाम देने का दावा हवाई साबित हो रहा है। प्रदेश में ऐसी कई खिलाड़ी हैं जो वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद सरकार की अनदेखी के कारण नकद इनाम को तरस रही हैं।
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भिवानी की बाक्सरों ने जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो गोल्ड और एक सिल्वर जीता है, लेकिन उन्हें आज तक इनाम नहीं मिला। वहीं, सीनियर नेशनल चैंपियन और आल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियन बाक्सर भी नकद इनामी राशि पाने को जूझ रही हैं। चैंपियन बनने के एक साल बाद भी सरकार ने उनसे इनामी राशि देने के लिए आवेदन तक नहीं मांगे हैं। सभी महिला बाक्सरों ने सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं।

भिवानी के गोठरा गांव की सविता ने साल 2015 में चीन में हुई जूनियर वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में 50 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। सविता के ही गांव की सोनिया ने 48 किलो में रजत पदक जीता था। भिवानी के धनाना की साक्षी ने 54 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। यह सभी इस समय साई की नेशनल एकेडमी में प्रैक्टिस कर रही हैं और उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।
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सरकार ने अभी तक नहीं ली इनकी सुध

बॉक्सिंग
खेल नीति के तहत स्वर्ण पदक जीतने वाली खिलाड़ी को सरकार से 20 लाख रुपये तो रजत पदक पर 15 लाख रुपये मिलने चाहिए थे। लेकिन सरकार ने इनकी सुध तक नहीं ली, जबकि इस बारे में कई बार अधिकारियों से बात कर चुकी हैं। इसी तरह साई एकेडमी में प्रैक्टिस करने वाली कलावती ने आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप साल 2015 में रजत पदक तो शिक्षा ने इसी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है।

खेल नीति के अनुसार इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने वाले को 50 हजार तो रजत पदक जीतने वाले को 30 हजार रुपये का नकद इनाम मिलना चाहिए। लेकिन इनको भी अभी तक इनामी राशि नहीं मिली है। ऐसे ही असम में साल 2015 में हुई सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली मोनिका को 5 लाख का नकद इनाम मिलना चाहिए। लेकिन उसे भी कोई इनाम नहीं दिया गया है।

इनाम नहीं मिलने से इन खिलाड़ियों को कई आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वह कहती हैं कि जिस समय उनको खेल में आगे बढ़ने के लिए रुपये की जरूरत है, उस समय उनको इनामी राशि नहीं मिल रही है। बाद में यदि मिल भी गई तो उसका क्या फायदा होगा? उनका कहना है कि वह कई बार खेल विभाग के अधिकारियों से बात कर चुकी हैं, लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।
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