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हरियाणा ट्रिब्यूनल के विरोध में हाईकोर्ट में तीसरे दिन भी ठप रहा काम, सरकार का बात मानने से इंकार

Thu, 01 Aug 2019 09:46 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकीलों ने बुधवार को हरियाणा प्रदेश प्रशासनिक अधिकरण के गठन के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। हाईकोर्ट बार के वकीलों ने गेट नंबर एक के पास धरना दिया और कोर्ट स्टाफ को छोड़कर अन्य किसी को भी कोर्ट में जाने नहीं दिया। हाईकोर्ट बार की कई दिनों से जारी हड़ताल के चलते बुधवार को हाईकोर्ट के पांच वकीलों ने इस विषय पर गतिरोध समाप्त करने के लिए हरियाणा के एडवोकेट जनरल से मुलाकात की और कुछ समय के लिए हरियाणा प्रदेश प्रशासनिक अधिकरण के गठन को टालने की मांग की।
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लेकिन एडवोकेट जनरल ने साफ तौर पर कह दिया कि किसी भी सूरत में प्रशासनिक अधिकरण के गठन को टाला नही जाएगा। सरकार के पास अब इस तरह का निर्णय लेने का अधिकार नही है। सरकार के इस रवैये से साफ हो गया हाईकोर्ट के वकीलों की हड़ताल कई दिन और चलने की संभावना हैं। वकीलों ने वीरवार सुबह 8:30 बजे एक बैठक कर आगे की रणनीति तय करने का निर्णय लिया हैं। बार एसोसिएशन के प्रधान दयाल प्रताप रंधावा का कहना है कि इस तरह के ट्रिब्यूनल और कमीशन डेमोक्रेसी के लिए खतरा हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार हाईकोर्ट की पावर को कम करना चाहती है। इसलिए ट्रिब्यूनल और कमीशन बना देती है, ताकि सरकार से जुड़े मामले हाईकोर्ट न पहुंचे और उन्हें निचले लेवल पर ही रफा दफा कर दिया जाए। वहीं पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार ऐसोसिएशन ने हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ की सभी बार एसोसिएशन से आग्रह किया है कि वो हरियाणा प्रशासनिक अधिकरण के विरोध में हाईकोर्ट बार ऐसोसिएशन का साथ दें और स्थानीय स्तर पर हरियाणा प्रशासनिक अधिकरण का विरोध करें।
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प्रशासनिक अधिकरण के बारे में अधिसूचना जारी

हरियाणा के एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन ने कहा कि हरियाणा प्रदेश प्रशासनिक अधिकरण का गठन हो चुका है और राज्य सरकार अब इस बारे में किसी भी तरह का निर्णय लेने में सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकरण के बारे में अधिसूचना जारी हो चुकी है। अब इसके गठन पर सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट की सलाह पर केंद्र सरकार ही कोई निर्णय ले सकती है।

राज्य सरकार कुछ नही कर सकती। सरकार केवल पंचकूला में बैंच के गठन के बारे में कुछ सोच सकती है। उन्होंने कहा कि बार की मांग को सरकार के पास भेजा जाएगा। फिलहाल हाईकोर्ट से सर्विस मैटर के लगभग दस हजार के करीब केस ट्रांसफर करने पर विचार होगा। बोर्ड व कारपोरेशन के केस प्रशासनिक अधिकरण में ट्रांसफर करने के लिए सरकार को अलग से अधिसूचना जारी करनी पड़ेगी।
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