मनी लॉन्ड्रिंग केस और सवालों की लंबी लिस्ट, करीब छह घंटे ईडी की पूछताछ चली और इस दौरान फारूक अब्दुल्ला चुप्पी साधे रहे। ईडी ने उनके वकील को अंदर जाने से मना कर दिया। अब्दुल्ला अकेले ही ईडी कार्यालय में अधिकारियों के सामने गए। 43 करोड़ के घोटाले में पूछताछ के लिए ईडी अधिकारियों ने सवालों की लंबी लिस्ट बना रखी थी।
अधिकारियों ने सवाल पूछा तो अब्दुल्ला ने घोटाले की जानकारी होने से साफ इंकार किया। उन्होंने कहा कि वह जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष थे। एसोसिएशन ने बीसीसीआई द्वारा दिए गए करोड़ों रुपये सिर्फ क्रिकेट को बेहतर करने के लिए खर्च किए हैं। सूत्रों के अनुसार, ज्यादातर सवालों पर अब्दुल्ला चुप्पी साधे रहे।
करीब छह घंटे की पूछताछ के बाद वह शाम साढ़े पांच बजे ईडी कार्यालय से बाहर आए। बता दें कि इससे पहले ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) जनवरी 2019 में भी जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन घोटाले में ही फारूक अब्दुल्ला से पूछताछ कर चुका है।
पूछताछ के बाद पंजाब सीएम हाउस पहुंचे अब्दुल्ला
सूत्रों के अनुसार, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला बुधवार सुबह शताब्दी एक्सप्रेस से चंडीगढ़ पहुंचे। इसके बाद वह चंडीगढ़ स्थित अपने वकील के घर गए। वहां से सुबह करीब सवा ग्यारह बजे अब्दुल्ला का काफिला सेक्टर-18 स्थित ईडी कार्यालय पहुंचा। इस दौरान उनके साथ वकील भी थे।
पूछताछ पूरी होने के बाद शाम को फारूक अब्दुल्ला पंजाब सीएम हाउस गए। वहीं, सूत्रों की मानें तो अब्दुल्ला ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मुलाकात की। इसके बाद अब्दुल्ला का काफिला देर शाम एयरपोर्ट की ओर रवाना हो गया।
ईडी ने सेक्टर-18 स्थित कार्यालय में किए बयान दर्ज
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला से राज्य क्रिकेट संघ में 43 करोड़ रुपये के घोटाले में 6 घंटे पूछताछ की। जांच एजेंसी के अधिकारी ने बताया कि अब्दुल्ला बुधवार सुबह करीब 11.30 बजे ईडी के चंडीगढ़ के सेक्टर-18 स्थित कार्यालय में पहुंचे, जहां मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत उनके बयान दर्ज किए गए।
शाम करीब 5.30 बजे वह कार्यालय से बाहर निकले। ईडी ने सीबीआई की एफआईआर और चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए अब्दुल्ला व अन्य तीन के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था।
यह है मामला
बीसीसीआई ने 2002 से 2011 के बीच जम्मू कश्मीर में क्रिकेट सुविधाओं के विकास के लिए 112 करोड़ रुपये दिए थे, लेकिन आरोप है कि इस राशि में से 43.69 करोड़ रुपये का गबन किया गया है। मामले को लेकर रणजी ट्राफी कोच और सेलेक्टर व कश्मीर के क्रिकेट खिलाड़ी माजिद अहमद ने 2015 में जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) घोटाले को लेकर हाईकोर्ट में पीआईएल फाइल की थी।
इसके बाद हाईकोर्ट ने सीबीआई को केस की जांच करने के आदेश दिए। सीबीआई ने आदेश के बाद मामला दर्ज किया। सीबीआई ने जांच कर जेकेसीए अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला, मोहम्मद सलीम खान (महासचिव), एहसान अहमद मिर्जा (खजांची) और बशीर अहमद मिसगर (बैंक में एग्जीक्यूटिव) के खिलाफ षड्यंत्र और विश्वास के आपराधिक उल्लंघन के आरोप लगाते हुए अदालत में चार्जशीट दायर की थी।
करीब 8 हजार पन्नों की चार्जशीट में धारा 120-बी, 406 और 409 के तहत आरोप लगाए गए हैं। हालांकि अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला ने आरोपों को खारिज किया है।