हरियाणा में नेशनल हाईवे पर लगे टोल प्लाजों वसूली जा रही टोल फीस से प्राइवेट और कॉमर्शियल वाहन चालकों की कमर टूट रही है। पानीपत-रोहतक-रेवाड़ी नेशनल हाईवे पर सबसे ज्यादा टोल फीस वसूली जा रही है।
इस पर हरियाणा सरकार ने भी आपत्ति जताई है और केंद्र से टोल फीस कम करने का आग्रह किया है। नेशनल हाईवे को अपग्रेड करने, फोर या सिक्स लेन बनाने के लिए केंद्र ने बिल्ट, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (बीओटी) आधार पर जब से काम शुरू किया है तब से वाहन चालकों से टोल वसूलना शुरू किया गया था।
केंद्रीय सड़क परिवहन और हाईवे मंत्रालय ने 2008 में टोल नीति बनाई थी। उसके तहत अपग्रेड होने वाले नेशनल हाईवे पर ज्यादा टोल वसूला जा रहा है जबकि 2010 की टोल नीति में कुछ राहत दी गई थी।
बावल से चंडीगढ़ तक सात जगह देना पड़ता है टोल
अगर कोई कार चालक बावल (रेवाड़ी) से चंडीगढ़ पहुंचता है तो उसे सात जगह टोल देना पड़ता है। बावल से चलते ही गंगायचा जाट टोल प्लाजा पर 65 रुपये टोल फीस अदा करनी पड़ती है।
यहां से 58 किलोमीटर चलने के बाद ढीगल टोल प्लाजा पर 25 रुपये और 32 किलोमीटर चलते ही मकरौली कलां पर 110 रुपये का टोल देना पड़ता है।
यहां से 59 किलोमीटर पर डाहर टोल प्लाजा आता है और कार चालक को 75 रुपये देने पड़ते हैं। डाहर के बाद पानीपत एलिवेटेड हाईवे पर वाहन चालक चढ़ जाता है।
बावल (रेवाड़ी) से पानीपत तक 165 किलोमीटर में पांच टोल प्लाजों पर 275 रुपये देने पड़ते हैं। पानीपत एलिवेटेड हाईवे पर, नीलोखेड़ी और दप्पर (पंजाब) पर 169 रुपये टोल फीस के देने पड़ते हैं।
बावल से चंडीगढ़ तक 315 किलोमीटर के लिए 444 रुपये का टोल देना पड़ता है। ट्रक, लाइट व्हीकल और हैवी व्हीकल्स को कार से कई गुना टोल देना पड़ता है।
हरियाणा में हाईवे पर हैं 10 टोल प्लाजा
-हरियाणा में नेशनल हाईवे पर 10 टोल प्लाजा हैं। ये चंडीमंदिर, बदरपुर, खेड़की दौला, पलवल, नीलोखेड़ी, पानीपत, डाहर, मकरौली कलां, डीघल और गंगायचा जाट।
-दिल्ली-चंडीगढ़ एनएच पर पानीपत से अंबाला तक सिक्स लेन का काम बीच में रुका पड़ा है।
-इन टोल प्लाजों पर सिर्फ दोपहिया वाहनों, थ्री-व्हीलरों, ट्रैक्टरों और पशुचालित वाहनों को टोल से छूट है।
-सामान्य तौर पर दो टोल प्लाजों के बीच की दूरी कम से कम 60 किलोमीटर होनी चाहिए। मगर बाईपास की सूरत में यह दूरी कम हो सकती है।
-सामान्य तौर पर किसी शहर की सीमा से 10 किलोमीटर दूर टोल प्लाजा होना चाहिए। अगर किसी शहर के लिए बाईपास बनाया गया है तो शहर की सीमा के साथ भी टोल प्लाजा लग सकता है।
सड़क पर जरा भी चूके तो गाड़ी नीचे गड्ढे में
अंबाला-राजपुरा बॉर्डर पर टोल बैरियर से रोज हजारों वाहनों का आवागमन होता है। ‘अमर उजाला’ की टीम काफी देर तक टोल पर खड़ी नजारा देख रही थी। मिनटों में ही टोल पर वाहनों की लंबी कतारें लग जातीं और मिनटों में ही टोल के नाम पर हजारों रुपये की वसूली हो जाती।
वसूली जा रही टोल राशि की सुरक्षा के लिए बाकायदा वर्दीधारी कई सिक्योरिटी गार्ड भी तैनात थे लेकिन वाहन चालकों की असुविधा पर किसी को ध्यान नहीं।
अमृतसर से पानीपत जा रहे रविंद्र शर्मा ने बताया कि ये लोग इसी तरह मोटा टोल तो वसूल रहे हैं, लेकिन हाईवे की हालत इतनी खराब है, जिसे बयां नहीं किया जा सकता। आने-जाने में ही सैकड़ों रुपये का टोल दे चुके हैं।
खतरे का हाईवे
दिल्ली से लुधियाना जा रहे श्रीपाल शर्मा का दर्द था, ‘वे रास्ते में देखते आए हैं कि कई फ्लाईओवर अधूरे पडे़ हैं। बारिश में कई जगह गीली चिकनी मिट्टी हाईवे पर आई हुई है, जिससे तेज रफ्तार कार का अनियंत्रित होने का खतरा रहता है। नेशनल हाईवे नंबर वन ऐसा होता है क्या? अंबाला की हद से शंभू टोल बैरियर की ओर चलते ही वाहन के साथ खतरा भी चलता है।
शुरुआत घग्गर नदी के पास से ही हो जाती है। मंजी साहब गुरुद्वारे, इंडस्ट्रियल एरिया चौक, कालका चौक, जंडली चौक, शाहपुर व दुखड़ी चौक पर अधूरे पड़े फ्लाईओवर व पुल इस खतरे का और बढ़ा देते हैं। सड़क जर्जर, एक जगह से सड़क ऊंची, तो साथ सटी सड़क जर्जर और नीची, अचानक नियंत्रण बिगड़े तो गाड़ी सड़क से नीचे सीधे गड्ढ़े में।
कोई सेफ्टी साइन या अचानक आए मोड़ की सूचना देने वाले बोर्ड नहीं। सभी अधूरे फ्लाईओवर बंद। शहरवासियों को भी कई किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है या फिर हाईवे पर ही गलत दिशा में चलकर अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है।
अंबाला टोल प्लाजा की 24 घंटे की फीस
कार, जीप, वैन---------------63 रुपये
हल्के कार्मिशियल वाहन-------110 रुपये
ट्रक, बस---------------------221 रुपये
दो एक्सल से ज्यादा वाले वाहन--355 रुपये
नेशनल हाईवे पर टोल के रेट निर्धारित नीति के अनुसार तय किए जाते हैं। कोई भी मनमानी वसूली नहीं कर सकता। हाईवे प्रोजेक्ट पर काफी बड़े पैमाने पर निवेश होता है। उस राशि पर बैंक का ब्याज और बाकी खर्च जोड़कर ही कंपनी अपना लाभ निकालती है। थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर टोल की दर बढ़ाई जाती हैं।
-विपिन शर्मा, महाप्रबंधक, तकनीकी एवं परियोजना निदेशक, सीएमयू, एनएचआई