सुहाने सफर के लिए जानी जाने वाली हरियाणा रोडवेज की वॉल्वो बसें खटारा होने के बावजूद रूट पर दौड़ाई जा रही हैं। बसों की हालत इतनी बदतर है कि जरा सी बारिश होने पर ये टपकना शुरू कर देती हैं। तेज बारिश होने पर बस में सवार यात्री भीग रहे हैं। ड्राइवरों ने खुद को भीगने से बचाने के लिए अपनी खिड़की के ऊपर प्लास्टिक की खाली बोतलें बारिश का पानी बाहर निकालने के लिए लगाई हुई हैं।
बसों की सीटें आरामदायक नहीं रही। जगह-जगह बसों में धूल जमी हुई है। बसें इतनी खटारा हो चुकी हैं कि उन्हें तय गति सीमा के भीतर दौड़ाने से भी ड्राइवर डरते हैं। इससे दिल्ली-चंडीगढ़ के बीच की दूरी तय करने में एक घंटे का समय अतिरिक्त लग रहा है। इससे सवारियां परेशान हो रही हैं। बसों के बंपर तक टूट चुके हैं, उन्हें बेल्डिंग कर लगाया गया है। सब कुछ जानते हुए भी परिवहन विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।
गुरुग्राम और चंडीगढ़ डिपो की लगभग चालीस वॉल्वो बसें 12 लाख किलोमीटर से ऊपर चल चुकी हैं। परिवहन नियमों के अनुसार इन्हें आठ लाख किलोमीटर या आठ साल पूरा होने के बाद नहीं चलाया जा सकता। चालीस वॉल्वो की खरीद हरियाणा सरकार ने 2012 में की है, जबकि दस मर्सिडीज बेंज 2013 में खरीदी हैं। वॉल्वो के आठ साल तो पूरा नहीं हुए, मगर बसें कम और दिल्ली, चंडीगढ़-गुरुग्राम के बीच रूट ज्यादा होने पर इनके किलोमीटर की संख्या बारह लाख पार कर चुकी है।