सरकार और रोडवेज कर्मियों के बीच टकराव कम होने के बजाए और बढ़ गया है। ऐसे में बसों की हड़ताल तीन दिन और बढ़ गई है, वहीं 10 यूनियन नेता टर्मिनेट कर कर दिए गए हैं। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के पदाधिकारियों ने हिसार में एक गोपनीय बैठक कर चार दिन से चल रही हरियाणा रोडवेज की इस चक्काजाम हड़ताल को अगले तीन दिन तक और बढ़ा दिया है। अब हरियाणा रोडवेज की बसों का 22 अक्टूबर तक चक्काजाम रहेगा। उधर, हड़ताल में सक्रिय रोडवेज की विभिन्न यूनियनों के पदाधिकारियों पर भी सरकार की नजर टेढ़ी हो गई है।
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एस्मा के बावजूद बसों का चक्काजाम करवाने के लिए सरकार ने सीधे तौर पर रोडवेज यूनियनों के दस पदाधिकारियों को जिम्मेदार माना है। इसके चलते विभाग ने यूनियनों के दस नेताओं एवं रोडवेज कर्मियों को टर्मिनेशन नोटिस जारी कर दिए हैं। टर्मिनेशन नोटिस में इन यूनियन नेताओं से पूछा गया है कि वे 15 दिन के भीतर बताए कि प्रदेश में एस्मा लागू होने के बावजूद क्यों चक्का जाम किए हुए हैं। इस वजह से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तय सीमा में यदि यूनियन नेताओं ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो उन्हें सेवामुक्त कर दिया जाएगा।
खानापूर्ति को चलीं 638 रोडवेज बसें
सरकार का दावा है कि शुक्रवार को 638 रोडवेज बसों को चलाया गया, लेकिन वास्तविकता यह थी कि इनमें से अधिकतर बसें महज खानापूर्ति के रूप में चलीं। बस अड्डों से अधिकतर बसों को उन छोटे रूटों पर चलाया गया, जहां तक यात्रियों का आटो व सूमो के जरिये पहुंचना संभव था। लंबे रूट पर इनमें से कुछेक बसें ही चलीं, इन बसों को भी मुख्यमार्गों पर फ्लाइओवर के ऊपर से निकाला गया, जबकि यात्री फ्लाई ओवरों के नीचे बस अड्डों पर खड़े बसों का इंतजार ही करते रह गए। इन बसों में सवार यात्रियों को भी फ्लाईओवरों पर उतारा गया। रोजाना चलने वाली 1059 सहकारी समिति की बसें भी चलाई गई।
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रोडवेजकर्मियों के समर्थन में आवाज बुलंद
roadways bus
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के समर्थन में हरियाणा अनुसूचित जाति राजकीय अध्यापक संघ (हजरस) भी उतर आया है। प्रधान प्रेम बाकोलिया व महासचिव बलजीत सिंह दहिया ने कहा कि हरियाणा सरकार कर्मचारियों से बातचीत का रास्ता न अपना कर सरकार निजीकरण का विरोध कर रहे कर्मचारियों पर एस्मा लगाने, लाठीचार्ज करने, गिरफ्तारी और बर्खास्तगी जैसी दमनकारी नीतियों पर चल रही है। जो अलोकतांत्रिक है, जिसे हजरस ने इसे घोर निंदनीय करार देते हुए कड़ी निंदा की।
उनके अनुसार सरकार आज परिवहन विभाग का निजीकरण करके कल स्वास्थ्य विभाग का व शिक्षा विभाग का निजीकरण करेगी और इस प्रकार से सरकार शासन-प्रशासन में आरक्षित वर्गों के प्रतिनिधित्व को समाप्त करने तथा सार्वजनिक क्षेत्र की सेवाओं को व्यापारियों के हवाले करके व्यापारीकरण को बढ़ावा दे रही है। उधर, हजरस के जिला अंबाला इकाई के इसी बाबत मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। जिला प्रधान बलविंद्र सिंह ने सीएम को पत्र लिखे पत्र में कहा है कि वे हड़ताल को जल्द खत्म करवाकर जनता को राहत दिलवाएं।
चार दिन की हड़ताल के बाद भी सरकार की ओर से तालमेल कमेटी से बातचीत के रास्ते नहीं खोले गए हैं। इसलिए बैठक कर 72 घंटों के लिए हड़ताल की अवधि और बढ़ाने का फैसला लिया है। अब 22 अक्तूबर तक बसों का चक्का जाम रहेगा।
- राजपाल नैन, प्रधान रोडवेज कर्मचारी यूनियन
15 दिन में जवाब नहीं दिया तो होंगे सेवामुक्त
हड़ताल में सक्रिय रोडवेज यूनियन पदाधिकारियों पर सरकार की नजर टेढ़ी हो गई है। एस्मा के बावजूद चक्काजाम करवाने के लिए सरकार ने यूनियनों के 10 पदाधिकारियों को जिम्मेदार माना है। विभाग ने यूनियनों के दस नेताओं और कर्मियों को टर्मिनेशन नोटिस जारी कर दिए हैं। नोटिस में यूनियन नेताओं से पूछा गया है कि वे 15 दिन के भीतर बताएं कि प्रदेश में एस्मा लागू होने के बावजूद क्यों चक्काजाम किए हुए हैं। इस वजह से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तय सीमा में यदि यूनियन नेताओं ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो उन्हें सेवामुक्त कर दिया जाएगा।
हरियाणा में 16 अक्टूबर से सरकारी बसों का चक्काजाम है। सरकार की किलोमीटर स्कीम पर प्राइवेट बसों को हायर करने के विरोध में विभिन्न रोडवेज कर्मचारियों की यूनियनें रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के बैनर तक मिलकर चक्काजाम हड़ताल कर रही है। सरकार भी इस हड़ताल को बातचीत के मसले से हल करवाने के बजाए सख्ती के मूड में दिख रही है। हरियाणा परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव धनपत सिंह के अनुसार कर्मचारियों के लिए बातचीत के सभी रास्ते खुले हैं। लेकिन वे इस बात को लेकर हड़ताल कर रहे हैं, वे वाजिब नहीं है।
सरकार जनता के लिए बसों की कमी के चलते किलोमीटर स्कीम पर सिर्फ प्राइवेट बसें हॉयर कर रही है, न कि सारा संचालन प्राइवेट एजेंसियों को दे रही है। लेकिन यूनियन के नेता बिना वजह रोडेवज कर्मियों के स्टाफ को भड़काकर चक्काजाम हड़ताल को आगे बढ़ा रहे हैं, जोकि अनुचित है। इससे जनता त्योहारी सीजन में भारी परेशानियों को रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार यूनियन नेताओं के इस अड़ियल रवैये के आगे झुकने वाली नहीं है। दूसरी ओर, हालांकि सरकार ने शुक्रवार को स्कूल की बसों को जनता के लिए सड़कों पर उतारा है। लेकिन सोमवार को स्कूल खुलते ही ये बसें वापस लौट जाएंगी और उसके बाद हालात और खराब हो जाएंगे।
कर्मचारी भी आरपार की लड़ाई के मूड में
पिछले चार दिन से चल रही अपनी हड़ताल अब तीन दिन तक और बढ़ा दिया है। अब ये हड़ताल 22 अक्तूबर तक चलेगी। इस संबंध में तालमेल कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों इंद्रसिंह बधाना, हरिनारायण शर्मा, अनुप सहरावत, दलबीर किरमारा,बलवान सिंह दोदवा, जयभगवान कादियान, सरबत सिंह पूनिया व पहल सिंह तंवर ने संयुक्त रूप से कहा कि हड़ताल के बावजूद कोई सबक नहीं ले रही, बल्कि अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किलोमीटर स्कीम पर प्राइवेट बसें लाने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों को बदनाम करने का असफल प्रयास करने में लगी है।
निजी कंपनियों से किलोमीटर स्कीम पर हायर की गई बसें सरकारी बसों की तुलना में महंगे खर्च पर चलेंगी जिससे रोडवेज कर्ज के दलदल में फंसकर बर्बाद हो जाएगा। उन्होंने कहा कि एस्मा व पुलिस दमन का भय पैदा करने की बजाय उस पर सकारात्मक विचार करें और निजी बसों के निर्णय को रद्द करे। तालमेल कमेटी के नेताओं ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक सरकार निजी बस चलाने के निर्णय और एस्मा के तहत की गई उत्पीड़न की तमाम कार्यवाहियों को वापिस ले। इसे लेकर रोडवेज कर्मचारी सरकार से आरपार करने का मन बना चुके हैं।