हरियाणा में रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल हर सरकार में होती रही है। निजी परमिट और निजी ऑपरेटरों को किलोमीटर स्कीम के तहत बसें चलाने से रोकने के लिए कर्मचारी यूनियनें पहले भी सरकार से टकराती रही हैं। मगर, 1993 की भजन लाल सरकार के बाद यह दूसरा मौका है जब रोडवेज कर्मियों की हड़ताल इतनी लंबी चली है। उस समय भी रोडवेज कर्मचारियों ने 953 परमिट निजी ऑपरेटरों को देने का विरोध करते हुए चक्काजाम कर दिया था, जो 15 दिन चला।
इसमें अन्य विभागों के कर्मचारी भी कूद पड़े थे। भजन लाल सरकार ने हरियाणा के इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 35 हजार सरकारी और अनुबंध कर्मचारियों की सेवाएं बर्खास्त कर दी थीं। हालांकि, 16 दिन सरकार को झुकना पड़ा था और सबकी नौकरी बहाल हुई थी। इस बार रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के आठ दिन पूरा हो चुके हैं। दस दिन की हड़ताल का एलान है।
किलोमीटर स्कीम ही तनातनी का कारण बनी हुई है। अब तक सरकार लगभग तीन सौ प्रोबेशनर कर्मचारियों को बर्खास्त कर चुकी है, तीन सौ से अधिक को नौकरी से बर्खास्तगी का नोटिस भेजा गया है। पांच सौ से अधिक चार्जशीट किए गए हैं। आधा दर्जन अधिकारी निलंबित व ट्रांसफर किए गए। पहले चरण में हुई अधिकारी स्तर की वार्ता फेल होने के बाद अब बुधवार को मंत्री स्तर की वार्ता होने जा रही है।
कर्मचारियों का एजेंडा केवल किलोमीटर स्कीम रद्द कराना है। इसके बिना बात शायद ही बन पाए। सबकी निगाहें बुधवार को होने वाली वार्ता पर टिक गई हैं। बुधवार को चंडीगढ़ बस स्टैंड से 12 बजे से दो बजे तक हर राज्य की बसों का संचालन बंद रहेगा। नॉर्थ जोन गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट वर्कर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने इसका एलान किया हुआ है। जिससे हरियाणा सरकार पर दबाव और बढ़ गया है। उधर, स्कूल शिक्षा विभाग ने हड़ताल में शामिल कर्मचारियों को ब्योरा तत्काल शिक्षा निदेशालय को भेजने के निर्देश जिला शिक्षा अधिकारियों को दिए हैं।