शहरी क्षेत्रों में हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 (समय-समय पर संशोधित) की धारा 7 ए के तहत घोषित, अधिसूचित गांवों की उस भूमि की रजिस्ट्री नहीं होंगी, जहां जमाबंदी वर्तमान में ऑफ़लाइन होने के साथ ही वेब-हैलरिस पर उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा कुछ समय के लिए नियंत्रित क्षेत्र में भी भूमि विलेखों का पंजीकरण नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बैठक में यह निर्देश दिए।
गलत रजिस्ट्री रोकने की फुलप्रूफ प्रणाली पर अभी चल रहा काम
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कहा कि हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 के तहत रजिस्ट्री में अनियमितताओं की जांच व निगरानी के लिए रोक की अवधि का उपयोग प्रौद्योगिकी आधारित प्रणाली स्थापित करने के लिए करें। इसका उद्देश्य कानून का उल्लंघन कर गलत रजिस्ट्रियों को रोकना है। प्रौद्योगिकी के तहत नगर एवं ग्राम आयोजना, शहरी स्थानीय निकाय, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, एचएसआईआईडीसी, शहरी संपदा, पुलिस, वन विभाग और मुकदमेबाजी मामलों को वेब-हेलरिस एप्लिकेशन के साथ इंटरफेस किया है।
18 लाख संपत्तियों का ब्योरा अपलोड, बाकी 31 अक्टूबर तक होगा
राज्य में शहरी क्षेत्रों में कुल 32 लाख संपत्तियां हैं, जिनमें से 18 लाख संपत्तियों के डाटा को विभाग के पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। शेष संपत्तियों को 31 अक्टूबर 2020 तक एकल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। हरियाणा राज्य औद्योगिक और अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) की लगभग 3.48 लाख संपत्तियां हैं। 2009 से इनका डाटा डिजिटल किया जा चुका है। 58,000 अधिग्रहित भूमि में से लगभग 26,000 का डाटा राजस्व विभाग की ई-पंजीकरण प्रणाली के साथ जोड़ दिया है।