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विधानसभा: पंचायती राज में बदलाव का सपना सदन के बाहर ही टूटा, लेकिन ये 12 विधेयक हुए पारित

Thu, 27 Aug 2020 01:54 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • राइट टू रिकॉल, महिलाओं को 50 फीसदी भागीदारी व बीसीए को 8 फीसदी आरक्षण में अड़ंगा
  • बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में विरोध के बाद सदन में पेश नहीं हुआ संशोधन विधेयक
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हरियाणा विधानसभा - फोटो : हरियाणा डीपीआर।
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विस्तार
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हरियाणा की पंचायती राज व्यवस्था में तीन बड़े बदलाव का सपना फिलहाल पूरा नहीं हो पाया। मानसून सत्र में सरकार हरियाणा पंचायती राज द्वितीय संशोधन व विधिमान्यकरण विधेयक-2020 पारित कराना चाह रही थी। मगर, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में ही इसका कड़ा विरोध हो गया। विरोध को देखते हुए सरकार इसे सदन में पेश न करने पर राजी हो गई।

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इसके पारित होने से ग्रामीणों को काम न करने वाले सरपंच को हटाने का अधिकार मिलना था। ग्रामीण एक साल के भीतर सरपंच को हटाने की मांग कर सकते थे। इसके अलावा बीसी-ए श्रेणी को आठ फीसदी आरक्षण का रास्ता भी साफ नहीं हो पाया। इससे पंचायती राज चुनावों में सरपंच, पंच, बीडीसी सदस्य, चेयरमैन, जिला परिषद सदस्य व चेयरमैन के पद पर पिछड़ा वर्ग श्रेणी को आरक्षण मिलना था। 

पंचायती राज चुनावों में महिलाओं को 50 फीसदी हिस्सेदारी पर भी मुहर नहीं लग पाई। इन तीनों बड़े बदलाव के लिए सरकार को अब अगले विधानसभा सत्र का इंतजार करना पड़ेगा। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला मानसून सत्र में इस विधेयक को पारित कराने का लंबे समय से दावा कर रहे थे, लेकिन भाजपा और कांग्रेस इस पर फिलहाल राजी नहीं हुईं। 
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राइट टू रिकॉल अहम मुद्दा है, जिसे विपक्ष बिना चर्चा के पारित करने को तैयार नहीं हुआ। कोरोना के कारण सत्र एक दिन तक ही सीमित कर दिया गया था, इसालिए सरकार भी जल्दबाजी में विधेयक पारित कराने के पक्ष में नहीं दिखी। राइट टू रिकॉल के पक्ष में भाजपा भी अंदरखाने नहीं दिख रही है। महिलाओं को 50 फीसदी हिस्सेदारी व बीसी-ए को 8 प्रतिशत आरक्षण देने में कांग्रेस को कोई आपत्ति नहीं है। 

कलेक्टर रेट के हिसाब से अतिक्रमण का जुर्माना वसूलने में अड़ंगा

हरियाणा में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों का जुर्माना सरकार अभी कलेक्टर रेट के हिसाब से नहीं वसूल पाएगी। विधानसभा में पंजाब ग्राम शामलात भूमि विनियमन संशोधन विधेयक-2020 पारित नहीं हो पाया। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने सदन में विधेयक पेश तो किया लेकिन कांग्रेस विधायकों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। जिस पर सरकार बिल पर चर्चा आगामी विधानसभा सत्र में कराने को राजी हो गई।

अभी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के एवज में सरकार पांच से दस हजार रुपये जुर्माना प्रति एकड़ के हिसाब से वसूल करती है। विधेयक के पारित होने पर यह जुर्माना कलेक्टर रेट के अनुसार प्रति एकड़ एक से दस प्रतिशत तक लगेगा। जुर्माना राशि दस प्रतिशत अधिकतम होगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इससे जनता को नुकसान नहीं लाभ होगा। 

अभी ज्यादा जुर्माना देना पड़ रहा है। इसका कांग्रेस विधायक जगबीर मलिक व बीबी बत्रा ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि कलेक्टर रेट काफी ज्यादा है, जिससे अवैध कब्जाधारियों को ज्यादा राशि चुकानी पड़ेगी। सरकार रियायत देने के बजाए बोझ डालने जा रही है। विधेयक में संशोधन करने के लिए सरकार इसे वापस ले। इसे देखते हुए दुष्यंत ने कहा कि अगर विपक्ष इस पर चर्चा कर संशोधन चाहता है तो सरकार आगामी सत्र में बहस के लिए तैयार है। इस विधेयक को सदन में पेश कर दिया गया है, इस पर चर्चा अगले सत्र में कर लेंगे। इससे संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाया। 
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ये संशोधन विधेयक हुए पारित

हरियाणा विधानसभा में कुल 12 विधेयक पारित किए गए। इनमें हरियाणा ग्रामीण विकास (संशोधन) विधेयक 2020, हरियाणा नगरपालिका क्षेत्रों में अपूर्ण नागरिक सुख-सुविधाओं तथा अवसंरचना का प्रबंधन (विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक 2020, हरियाणा लिफ्टस तथा एस्केलेटर अधिनियम (संशोधन) विधेयक 2020, हरियाणा नगर निगम (संशोधन) विधेयक 2020, हरियाणा नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2020, हरियाणा अग्निशमन सेवा (संशोधन) विधेयक 2020, हरियाणा नगर मनोरंजन शुल्क (संशोधन) विधेयक 2020, हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन (द्वितीय संशोधन तथा विधिमान्यकरण) विधेयक 2020, हरियाणा राजकोषीय उत्तरदायित्व तथा बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक 2020, हरियाणा विनियोग (संख्या 3) विधेयक 2020, हरियाणा माल और सेवा कर (संशोधन)विधेयक 2020 व हरियाणा मूल्य वर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2020 शामिल हैं।
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