लोकायुक्त जस्टिस प्रीतम पाल की सिफारिश के बाद रामकिशन फौजी का मुख्य संसदीय सचिव पद छिन सकता है।
लोकसभा चुनाव से ऐन पहले फौजी के लिए यह कदम राजनीतिक तौर पर भारी पड़ सकता है। सरकार भी लोकायुक्त की सिफारिश पर कार्रवाई कर सकती है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नजदीकी सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि जब गत छह सितंबर को इनेलो नेताओं ने सीपीएस रामकिशन फौजी की सीडी जारी की थी और उसी दिन विधानसभा में हंगामा हुआ था।
उस समय मुख्यमंत्री ने फौजी से इस्तीफा लेने का मन बना लिया था। मगर, उसी रात इनेलो नेताओं ने सीपीएस विनोद भ्याणा, जलेब खान के बेटे, विधायक नरेश सेलवाल और रामनिवास घोडेला की सीडी भी जारी कर दी।
कुछ क्षेत्रीय चैनलों पर ये सीडी प्रसारित हुई थीं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने फौजी से इस्तीफा लेने का मन इस आधार पर बदल लिया था कि अन्य से भी इस्तीफा लेने का दबाव बन सकता है। इसलिए फौजी से इस्तीफा नहीं लिया गया और जांच लोकायुक्त के पास भेज दी।
उचित कार्रवाई करेगी सरकार: मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा मंगलवार को दिल्ली में थे। उनका मोबाइल फोन भी बंद रहा। वह बुधवार को चंडीगढ़ पहुंचकर फौजी मामले की रिपोर्ट लेंगे।
उनके प्रधान सचिव एसएस ढिल्लों ने अमर उजाला के पूछने पर बताया कि सरकार के पास लोकायुक्त की रिपोर्ट नहीं पहुंची है।
जब रिपोर्ट मिल जाएगी तो सरकार देखेगी कि लोकायुक्त को जो संदर्भ भेजा गया था, क्या उसका पूरा जवाब मिल गया है। सरकार उनकी रिपोर्ट की छानबीन करेगी और पूरे मामले पर विचार करने के बाद उचित कार्रवाई करेगी।