अब इस मामले में गृह मंत्री ने यह पत्र लिखकर साफ कर दिया है कि डीजीपी द्वारा भविष्य में लिए जाने वाले फैसलों से उनका सरोकार नहीं होगा। उधर, इस मामले में हरियाणा प्रभारी तावड़े की भी अनिल विज के साथ लंबी मंत्रणा हो चुकी है।
मंगलवार को मुख्यमंत्री की प्रेस कान्फ्रेंस में सीएम द्वारा डीजीपी की सेवा विस्तार की सूचना दिए जाने के बाद वैसे तो इस मामले का पटाक्षेप हो गया था, लेकिन विज के पत्र के बाद मामला एक बार फिर से गर्मा गया है। लिहाजा यह विवाद अब लंबा चलने वाला है।
विवाद के बीच डीजीपी की कुर्सी पक्की
इस सारे विवाद के बीच डीजीपी मनोज यादव की कुर्सी पक्की हो गई है। अब केंद्र सरकार के ऊपर है कि वे उन्हें यहां से बुलाना चाहती है या नहीं। फिलहाल जिस तरह से सेवा विस्तार दिया गया है। उसे देखकर नहीं लगता कि डीजीपी साल भर से पहले यहां से जाएंगे।