वहीं पुलिस की ओर से एडीजीपी सुभाष यादव और आबकारी व कराधान विभाग से अतिरिक्त निदेशक विजय सिंह को शामिल किया गया है। मालूम हो कि पूर्व की हुड्डा सरकार के दौरान वाड्रा डीएलएफ मामले का खुलासा करने के बाद अनिल विज ने खेमका का समर्थन किया था और मंत्री बनने के बाद खेमका लंबे समय तक विज के महकमे में थे।
फिलहाल एसआइटी का हेड किसे बनाया जायगा, इसका आखिरी फैसला मुख्यमंत्री करेंगे और गृह मंत्री की ओर से मुख्यमंत्री के पास फाइल भेज दी गई है। विज ने बताया कि एसआईटी के गठन के साथ ही एक माह के अंदर शराब घोटाले में रिपोर्ट देनी होगी। पत्रकारों से बातचीत में विज ने कहा कि उन्हें प्रदेश के अलग-अलग गोदामों से चोरी की गई शराब में सैकड़ों करोड़ रुपये के घोटाले का अंदेशा है।
उन्होंने कहा कि इस घोटाले में कुछ बड़ी मछलियां भी शामिल हो सकती हैं, जो एसआईटी की जांच में सामने आ जायगा। इससे पहले विज ने कहा था कि यह घोटाला बिना पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत से नहीं हो सकता है। विज ने कहा कि एसआईटी पूरे प्रदेश में हुए शराब घोटाले की जांच करेगी ताकि सच्चाई सामने आ सके।