अनिल विज ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों की बुधवार को बैठक भी ली। उन्होंने सभी अधिकारियों के साथ कोरोना से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और समस्याओं को सुना। विज ने डॉक्टरों व अन्य कर्मचारियों में संक्रमण के मामले सामने आने पर चिंता जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी सबसे पहले अपनी जांच करवाएं।
उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के संक्रमित होने का एक कारण विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा दान दी गई कम गुणवत्ता वाली पीपीई किट का इस्तेमाल करना भी है। इसलिए उन्होंने विभाग को आदेश दिए कि सरकार द्वारा खरीदी गई पीपीई किट का ही प्रयोग करें। विज ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फ्रंट फुट पर कोरोना के खिलाफ लड़ने वाले सभी पुलिस व सफाई कर्मचारियों की भी कोरोना जांच करवाई जाए।
हरियाणा में जो लोग अपने निजी वाहनों से प्रदेश में वापस आने के इच्छुक हैं। उन्हें इसके लिए जारी किए गए विशेष ई-दिशा माइग्रेंट सर्विस संबंधित वेबसाइट पर आवेदन करना होगा। आवेदन के दौरान जो तथ्य संबंधित लोग भरेंगे, उनमें यदि गड़बड़ी पाई गई तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। हरियाणा पुलिस इन तथ्यों पर खास नजर रखेगी।
हरियाणा के एडीजीपी लॉ एंड आर्डर नवदीप सिंह विर्क के अनुसार इसके लिए वेबसाइट पर एक खास प्रोफॉर्मा मौजूद है। इसे आवेदक को भरना होगा। एडीजीपी विर्क ने बताया कि हरियाणा में बहुत से लोग ऐसे हैं, जो विभिन्न राज्यों से अपने निजी वाहनों में वापस आने की इच्छा रखते हैं। इन लोगों को सबसे पहले संबंधित वेबसाइट पर खुद को पंजीकृत करना होगा। इस दौरान एक खास प्रोफॉर्मा आवेदक को भरना होगा, जिसके बाद उन्हें अपने निजी वाहन से प्रदेश में आने की अनुमति मिलेगी।
यात्रा शुरुआत से पहले उन्हें अनुमति डाउनलोड करनी होगी। जिसे वह हरियाणा की सीमा जांच चौकियों पर अपनी मेडिकल स्क्रीनिंग के दौरान वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को दिखाएंगे। इस प्रोफॉर्मा में प्रदेश में आने वाले व्यक्ति को अपना नाम और मोबाइल नंबर, अपनी उम्र, पेशा, मौजूदा रेजिडेंशियल ऐड्रेस, डेस्टिनेशन एड्रेस, इंस्टिट्यूट ( जहां वे काम करता है) का नाम, अपने घर का एड्रेस और अपनी लास्ट मेडिकल चेकअप की डेट और डिटेल इत्यादि जानकारियां भरनी होगी।
इस दौरान प्रोफॉर्मा में उसे डिक्लेअर करना होगा कि वे पिछले 30 दिनों में किसी कंटेनमेंट जोन में नहीं रह रहा है। प्रोफॉर्मा में भरी तमाम जानकारियां पूरी तरह से सत्य हैं। यदि इन तथ्यों में कुछ भी गलत पाया गया तो उसके खिलाफ आईपीसी, डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट और एपिडेमिक एक्ट के तहत कोई भी कार्यवाही की जा सकती है।