इंटरनेशनल वूमेन्स डे पर विभाग ने एक ऐसा महिला विरोधी सरकारी फरमान जारी कर डाला, जिसे पढ़कर हर कोई हक्का बक्का रह गया। मामला हरियाणा का है। नए नियम के अनुसार ज्यादा छुट्टियां लेने वाले डॉक्टरों का प्रमोशन देरी से होगा, क्योंकि अवकाश का समय उनके अनुभव में नहीं जोड़ा जाएगा। इससे प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर प्रमोट होना अब आसान नहीं रहेगा।
यही नहीं, स्वास्थ्य विभाग के इस तुगलकी फरमान की वजह से प्रमोट हो चुके डॉक्टरों को रिवर्ट कर दिया जाएगा। वहीं, नये नियम से महिला डॉक्टर अधिक प्रभावित होंगी। उधर, पीजीआईएमएस में डॉक्टरों की शुक्रवार देर रात मीटिंग हुई और प्रशासन के फैसले के विरोध में 15 मार्च को दोपहर एक बजे आपातकालीन बैठक बुलाई है। नए नियम से पीजीआईएमएस में ही प्रभावित होंगे 200 से अधिक डॉक्टर।
स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मेडिकल एजूकेशन एंड रिसर्च विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि जिन डॉक्टरों ने चाइल्ड केयर लीव, मैटरनिटी लीव, अबॉर्शन लीव, अर्नड लीव, स्टडी लीव, एक्ट्रा ऑर्डिनरी लीव, मेडिकल लीव, हॉफ पे लीव (कैजुअल लीव, रिस्ट्रिक्टेड होली डे, अकेडमिक लीव, विंटर व समर वेकेशन को छोड़कर) का समय अनुभव में काउंट नहीं होगा। इन छुट्टियों का समय असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर बनने के चार साल के अनुभवों में नहीं जोड़ा जाएगा।