हरियाणा के सिखों ने 2001 में अलग कमेटी गठित करने की मुहिम शुरू की थी। जिला और खंड स्तर पर सिखों के साथ मीटिंग करनी शुरू कर दी थी। इसकी कमान जगदीश सिंह झींडा और अन्य सिखों ने संभाली। उन्होंने 2003 में एडहॉक कमेटी बनाकर पंजीकृत करवा ली। झींडा ने बताया कि वे सिखों को बताते थे कि हरियाणा के गुरुद्वारों से हो रही आमदनी एसजीपीसी के पास चली जाती है। हरियाणा में न स्कूल खोले जा रहे हैं और न कॉलेज।
पंजाब में लगातार स्कूल और कालेज खुल रहे हैं। झींडा ने कहा कि वर्ष 2004 में एसजीपीसी के चुनाव हुए तो उनके ग्रुप के सात और दूसरे ग्रुप के चार सदस्य जीते। वर्ष 2005 में विधानसभा चुनाव आ गए तो कांग्रेस ने अलग कमेटी बनाने का वादा कर दिया। कांग्रेस की सरकार बनी मगर अलग कमेटी नहीं बनाई। चट्ठा कमेटी के पास पौने तीन लाख सिखों ने भी भी शपथ पत्र दिए थे। उन्होंने कहा कि हरियाणा की अलग कमेटी बननी चाहिए।
क्या हरियाणा सरकार अलग कमेटी बनाने में सक्षम है?
एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ लगातार अलग कमेटी बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं। वे कहते हैं कि हरियाणा की अलग कमेटी नहीं बन सकती। वे गुरुद्वारा एक्ट का हवाला देते हैं।
जगदीश झींडा का कहना है कि हरियाणा सरकार अगर विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर दे तो मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय के पास प्रस्ताव जाएगा। गृह मंत्रालय राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजेगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिली तो कमेटी बन सकती है।
चट्ठा कमेटी ने की है अलग कमेटी की सिफारिश
हरियाणा विधान सभा के तत्कालीन स्पीकर हरमोहिंदर सिंह चट्ठा ने हरियाणा सरकार से अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी गठित करने की सिफारिश कर रखी है। मगर एडवोकेट जनरल हवा सिंह हुड्डा से इस रिपोर्ट पर पांच साल से कानूनी राय नहीं मिली। दरअसल, चट्ठा कमेटी ने हरियाणा के सिखों से अलग कमेटी बनाने के पक्ष और विरोध में राय मांगी थी। करीब पौने तीन लाख सिखों ने अलग कमेटी बनाने के पक्ष में शपथ पत्र दिए थे। खिलाफ एक भी शपथ पत्र नहीं आया।
शपथ पत्रों की जांच करने के बाद चट्ठा कमेटी ने मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट में अलग कमेटी गठित करने की सिफारिश कर दी थी। उन्होंने 20 फरवरी, 2009 को हरियाणा विधानसभा में बोलते हुए कहा था, ‘मैं कमेटी का अध्यक्ष था। हमने लंबी हिस्ट्री ट्रेस की है। अलग एसजीपीसी गठित करने से संबंधित रिपोर्ट मैंने मुख्यमंत्री को सौंप दी है। मैंने उनसे आग्रह किया है कि इस रिपोर्ट पर आगे एक्सपर्ट ओपिनियन के लिए एडवोकेट जनरल के नीचे तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर आगे की कार्यवाही करवा ली जाए।’ तब से यह रिपोर्ट कानूनी राय के लिए एडवोकेट जनरल के पास लंबित पड़ी है।
बादल के विरोध के चलते लटका मामला
मगर यह ऐसा मामला नहीं है कि जिस पर कानूनी राय लेने में पांच साल से ज्यादा समय लग जाए। वास्तविकता यह है कि हरियाणा कांग्रेस सरकार चाहते हुए भी राजनीतिक कारणों से यह कमेटी गठित नहीं कर सकी। पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल इसका लगातार विरोध कर रहे हैं। उनके यूपीए सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ विशेष संबंध थे।
प्रधानमंत्री नहीं चाहते थे कि अलग कमेटी बने। इसलिए यह मामला एडवोकेट जनरल की राय के नाम पर लटकाया जाता रहा। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक तंवर ने अमर उजाला को बताया था कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी हरियाणा की अलग कमेटी बनाने पर सैद्धांतिक तौर पर सहमत हो चुकी हैं मगर उसका ऐलान लोकसभा चुनाव के बाद हो सकेगा।
मीटिंग बुलाएंगे और कानूनी राय सरकार को भेज देंगे
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अलग कमेटी बन सकती है या नहीं, यही कानूनी राय तो हमारी कमेटी ने देनी है। हम जल्द ही मीटिंग बुलाएंगे और कानूनी राय सरकार को भेज देंगे। अब तक दो बैठकें हुई हैं, मगर विधि परामर्शी ने समय मांग लिया था।
- हवा सिंह हुड्डा, एडवोकेट जनरल, हरियाणा।
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मैंने तो अलग कमेटी बनाने की सिफारिश कर रखी है। मेरी राय में अलग कमेटी बन सकती है, मगर एडवोकेट जनरल ज्यादा कानून जानते हैं। इसलिए कानूनी राय बता सकते हैं।
- हरमोहिंदर सिंह चट्ठा, वित्त मंत्री, हरियाणा।