हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी की कार्यकारिणी में प्रधानगी को लेकर उछला विवाद सुलझ गया है। लगातार पांच घंटे तक चली मीटिंग में जगदीश सिंह झींडा की अगुवाई वाली कमेटी को ही अगले ढाई साल तक कायम रखने का फैसला किया गया है। हालांकि मीटिंग की शुरुआत बड़ी तू तकरार से हुई मगर जब मीटिंग खत्म करके सभी मेंबर बाहर आए तो उनके चेहरे तनाव मुक्त थे।
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गुरुद्वारा साहिब पातशाही छटी व नौंवी में हुई महत्वपूर्ण मीटिंग में एचएसजीएमसी के 38 में से 32 मेंबरों ने भाग लिया। संत दादूवाल ने दावा किया कि पहली बार इतनी बड़ी संख्या में कार्यकारिणी के सदस्य आए हैं। दादूवाल ने कहा कि पिछले कुछ महीनों की घटनाओं से हरियाणा कमेटी के सदस्यों में आपसी दुराव पैदा हो गया था, जिस कारण हरियाणा में अलग कमेटी बनाने के आंदोलन को भी चोट पहुंच रही थी।
दादूवाल ने कहा कि रविवार को झींडा और नलवी दोनों पक्षों ने तख्त श्री दमदमा साहिब का जत्थेदार होने के नाते मामला सुलझाने की जिम्मेवारी उनके सिर सौंपी। सभी पक्षों में सुलह हो गई है। झींडा प्रधान रहेंगे, नलवी उपाध्यक्ष रहेंगे और बाकी कार्यकारिणी भी जस की तस काम करेगी। काबिले जिक्र है कि पिछले महीने कैथल के गुरुद्वारा नीम साहिब में हरियाणा कमेटी की हुई मीटिंग में जगदीश सिंह झींडा को प्रधानगी से निलंबित करके उपप्रधान दीदार सिंह नलवी को 7 मई तक के लिए कार्यकारी प्रधान बना दिया गया था।
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झगड़ा होता देख पत्रकार निकाले बाहर
जगदीश झींडा
- फोटो : File Photo
झगड़ा होता देख पत्रकार निकाले बाहर
एचएसजीएमसी की मीटिंग शुरू होते ही दीदार सिंह नलवी व जगदीश सिंह झींडा के समर्थक सदस्यों में बहस शुरू हो गई। बैठक में मौजूद पत्रकारों ने जैसे ही अपने कैमरे सीधे किए तुरंत बाबा बलजीत सिंह दादूवाल ने पत्रकारों को मीटिंग से बाहर जाने को कह दिया। जगदीश सिंह झींडा ने पत्रकारों के बैठे रहने की वकालत की तो दादूवाल खुद मीटिंग छोड़कर बाहर जाने को तैयार हो गए। स्थिति को भांपते हुए झींडा ने पत्रकारों और सादी वर्दी में बैठे पुलिसवालों को बाहर चले जाने का निवेदन किया। बाद में दफ्तर के तमाम दरवाजे खिड़कियां बंद करके मीटिंग शुरू की गई।
मान लिया झींडा का स्पष्टीकरण
बैठक के बाद तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल सामने आए। दादूवाल ने कहा कि एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा पर आरोप था कि वे बादल फैमिली के साथ मिलीभगत करके अकाल तख्त पर पेश हुए थे। दादूवाल ने बताया कि इस मामले में झींडा ने अपना स्पष्टीकरण दिया, जिससे पूरा हाउस संतुष्ट हो गया।
तीन मेंबर बाहर, तीन अंदर
मीटिंग में तीन वरिष्ठ सदस्यों हरपाल सिंह पाली, गुरमीत सिंह तिलोकेवाल और भूपेंद्र सिंह असंध की मीटिंगों में आने की असमर्थता को देखते हुए उन्हें सदस्यता से मुक्त करने का फैसला किया। इनके स्थान पर करनैल सिंह निमनाबाद, जसबीर सिंह भाटी व बलदेव सिंह बल्ली को नए सदस्यों के तौर पर कार्यकारिणी में शामिल किया गया।
गुरुद्वारे का पैसा नहीं लग रहा है गुरुघर में : खजान सिंह
इस बीच बैठक में अकाली दल मान के गर्म दल के नेता खजान सिंह के नेतृत्व में दर्जनों युवक गुरुद्वारा परिसर में पहुंच गए। लेकिन बैठक स्थल के बाहर तैनात सुरक्षा प्रहरियों ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। बाद में खजान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए आरोप लगाया कि गुरुद्वारे का पैसा गुरुघर में नहीं लग रहा है।
उन्होंने कहा कि 2014 से पहले यहां पंजाब कमेटी का कब्जा था और उसके बाद हरियाणा कमेटी का कब्जा है। अब गुरुद्वारे की सालाना आमदनी 72 लाख रुपये है, जिसका कोई हिसाब किताब नहीं है। जैसी गड़बड़ी पंजाब कमेटी कर रही थी वही गड़बड़ी अब हरियाणा कमेटी कर रही है। उन्होंने गुरुद्वारे में नौकरियों के मामले में भी स्थानीय युवाओं की अनदेखी का आरोप लगाया।
बादल के जत्थेदारों में नहीं आस्था : झींडा
मीटिंग के बाद झींडा ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वे मात्र धार्मिक आस्था के वशीभूत अकाल तख्त गए थे। उनका न तो बादलों और न ही उनके बनाए जत्थेदारों में कोई आस्था है। झींडा ने कहा कि पिछले दिनों सरबत खालसा में जो तीन जत्थेदार बनाए गए थे, उनका पूरा समर्पण और समर्थन उन्हीं के साथ है।
अखबारों को बताया झगड़े का कारण
संत दादूवाल ने हरियाणा कमेटी में उठे विवाद के लिए अखबारों को ही दोषी बता दिया। पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में दादूवाल ने कहा कि बात छोटी होती है अखबार बड़ी करके छाप देते हैं और विवाद हो जाता है। हरियाणा कमेटी मामले में भी ऐसा ही हुआ है, लेकिन सब कुछ सुलझा लिया गया है।