मंगलवार सुबह 9 बजे ही राज्यपाल के पहुंचने से पहले ही इमरजेंसी की ओर जाने वाले रास्ते बंद करवा दिए गए। इमरजेंसी की ओर किसी भी व्यक्ति को जाने नहीं दिया जा रहा था। जिसे इमरजेंसी सुविधा की जरूरत थी उसे ही जाने दिया गया। लोगों को अपने रिश्तेदारों से मिलने और ओपीडी जाने के लिए नए रास्तों से होकर गुजरना पड़ा। इमरजेंसी का रास्ता और ए ब्लॉक का रास्ता मंगलवार को आम लोगों के लिए बंद था। पैदल आने-जाने के लिए रास्ता खुला था।
सुरक्षा के चलते आम दरवाजे भी हुए लॉक
आम दिनों में लोगों के लिए परिसर के जो दरवाजे खुले रहते थे वह भी बंद दिखे। गेट बंद होने की जानकारी स्टाफ को भी न होने से वह भी आपस में उलझते नजर आए। हृदय आरोग्य केंद्र के बाहर किसी को भी बाहर खड़े होने की इजाजत नहीं दी गई। गर्भवती महिलाओं को भी चेकिंग करवाने के लिए दिक्कत का सामना करना पड़ा। जांच केंद्र प्रथम तल पर होने के कारण महिलाओं को ओपीडी के रास्ते से जाना पड़ रहा था। जबकि सामान्य दिनों मे इमरजेंसी के रास्ते से वहां इलाज करवाने के लिए विभाग में जाती थीं जो नजदीक है।
सुरक्षा में लगे सैकड़ों पुलिस कर्मी
राज्यपाल के सामान्य अस्पताल में आने की सूचना पर पुलिस प्रशासन की ओर से करीब 150 से अधिक जवानों को सुरक्षा में तैनात किया गया था। इसके अलावा पंचकूला की स्वैट टीम भी इमरजेंसी गेट पर तैनात रही। अस्पताल में हर एंट्री पर मेटल डिटेक्टर लगवाया गया था। इसके अलावा राज्यपाल के अस्पताल परिसर में पहुंचने से करीब पौना घंटे पहले डीसीपी कमलदीप गोयल सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण करने पहुंचे।