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हरियाणाः सीमेंट में घपलेबाजी से परेशान हैं तो अब ये तरीका अपनाएं और घोटालेबाजों को पकड़वाएं

Sat, 20 Jul 2019 10:29 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सीमेंट - फोटो : फाइल फोटो
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सीमेंट में घपलेबाजी के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। इस वजह से हादसों का सामना भी करना पड़ता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब घपलेबाज भी पकड़े जाएंगे और हादसे भी नहीं होंगे। दरअसल, हरियाणा में विभिन्न परियोजनाओं के विकास कार्यों में इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री का दुरुपयोग न हो, इसे लेकर प्रदेश सरकार गंभीर हो गई है। नई व्यवस्था में विकास परियोजनाओं के तहत अब कंस्ट्रशन साइट पर इस्तेमाल होने वाले सीमेंट और डीआई (डकटाइल आयरन) पाइप की फोटो एक विशेष वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी।
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हरियाणा सप्लाई एंड डिस्पोजल निदेशालय इस व्यवस्था तैयारी पर काम कर रहा है। जल्द ही इस व्यवस्था को सभी विभागों के लिए लागू कर दिया जाएगा। हरियाणा के विभिन्न विकास कार्यों में हर साल लगभग 450 करोड़ का सीमेंट और 650 करोड़ के डीआई पाइप का इस्तेमाल होता है। इस बड़ी खरीद के बाद कंस्ट्रक्शन साइट पर कई बार लापरवाही से या तो सीमेंट और डीआई पाइप की बर्बादी हो जाती है या फिर इसका दुरुपयोग हो जाता है। ऐसे में सरकार को बड़ा नुकसान होता है।

इस तरह की कई शिकायतें सरकार तक पहुंचती थी। इसी को रोकने के लिए अब ऐसी व्यवस्था की जा रही है, जिससे विभागों को कंस्ट्रक्शन साइट पर कितना सीमेंट लगा, इसके खाली कट्टों, सीमेंट के इस्तेमाल से तैयार ढांचों और किस प्रोजेक्ट में कहां-कहां डीआई पाइप डाला गया, इसके फोटो खास वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। जिसकी मॉनीटरिंग सप्लाई एंड डिस्पोजल निदेशालय करेगा।
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तैयार होगा ऑनलाइन ‘वर्चुअल स्टोर’

प्रदेश में विकास कार्यों के दौरान सीमेंट, डीआई पाइप व अन्य निर्माण सामग्री की खरीद में देरी न हो। इसके लिए इसी व्यवस्था के साथ ही पहली बार एक ऑनलाइन ‘वर्चुअल स्टोर’ भी तैयार किया जाएगा। इसमें निदेशालय औपचारिक प्रक्रिया के बाद कुछ ऐसी एजेंसियों को अधिकृत करेगा जो सीमेंट, डीआई पाइप व अन्य निर्माण सामग्री को उपलब्ध करवाएगी।

उसके बाद विभिन्न विभाग जिन्हें सीमेंट, डीआई पाइप इत्यादि की जरूरत होगी, वो इस वर्चुअल स्टोर पर पर जाकर अपनी जरूरत के हिसाब से आर्डर प्लेस करेगा और सीधे एजेंसी से माल साइट पर पहुंच जाएगा। इसकी सूचना संबंधित पोर्टल पर आ जाएगी और निदेशालय को मालूम चल जाएगा कि किस विभाग से किस एजेंसी से कितनी निर्माण सामग्री करवाई है और उसका कहां इस्तेमाल किया जा रहा है।
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