पूर्व में बेंच को बताया गया था कि वर्तमान में 293 चयनित सिपाही ही अलग अलग जिलों में कार्यरत हैं। सभी को सीबीआई जांच व कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए नोटिस जारी कहा है क्यों न इस भ्रष्ट तरीके से की गई इस भर्ती को रद्द कर दिया जाए।
यह था मामला
मामला 2003 से आरंभ हुआ था जब हरियाणा सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर हरियाणा पुलिस में भर्ती निकाली थी। 2004 में भर्ती प्रक्रिया आरंभ हुई और इसी दौरान एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में शिकायत की कि सभी एग्जाम क्लियर करने के बाद भी उसका नाम सूची में नहीं है।
उसे वेटिंग में डाल दिया गया है। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई और उसकी रिपोर्ट के अनुसार भर्ती के लिए बनाई गई कमेटी के चेयरमैन को तलब किया था।
चेयरमैन से जब रिकॉर्ड मांगा गया तो उसमें छेड़छाड़ होने की बात सामने आई। बाद में एसपी ने कहा कि उन्होंने चयनित उम्मीदवारों के स्थान पर डीजीपी द्वारा सौंपी गई सूची में मौजूद लोगों को नौकरी दी। मामले में हाईकोर्ट ने हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी को यह मामला कार्रवाई के लिए सौंपा था परंतु कार्रवाई न होने पर याचिकाकर्ता पुन: हाईकोर्ट पहुंच गया था।