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हरियाणा में मधुमक्खी पालकों की पौ बारह, अब 85 फीसदी तक मिलेगा अनुदान...पहले 40 मिलता था

Fri, 18 Sep 2020 03:23 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
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Honey Bee - फोटो : Pexels.com
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हरियाणा में शहद उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार मधुमक्खी पालन पर जोर देगी। कोरोना लॉकडाउन के बाद मनोहर लाल सरकार ने शहद उत्पादन में भी सिरमौर बनने का निर्णय लिया है। इसके लिए विभिन्न मदों में अनुदान राशि 40 फीसदी से बढ़ाकर 85 फीसदी तक कर दी गई है। सरकार का इसके पीछे मुख्य उद्देश्य किसानों को मधुमक्खी पालन की तरफ आकर्षित करना है।
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देश में सिर्फ हरियाणा ही एकमात्र ऐसा प्रदेश है, जिसने मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए अनुदान को 45 फीसदी तक बढ़ाया है। उद्यान विभाग जल्द ही मधुमक्खी पालन, संवर्धन व अन्य योजनाओं में बढ़ाई गई अनुदान राशि का प्रचार-प्रसार बड़े पैमाने पर किसानों, बागबानों व बेरोजगार युवाओं के बीच करेगा ताकि अधिक से अधिक लोग मधुमक्खी पालन को अपनाएं।

जिला उद्यान अधिकारी या उपनिदेशक रामनगर से करें संपर्क: सैनी
उद्यान विभाग के महानिदेशक डॉ. अर्जुन सिंह सैनी ने कहा कि विभिन्न योजनाओं में बढ़ी अनुदान राशि का लाभ लेने के लिए किसान, बागबान व युवा अपने-अपने जिलों के उद्यान अधिकारियों या फिर उपनिदेशक एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र रामनगर, कुरुक्षेत्र से सीधे संपर्क करें। वहीं पर आवेदन कर योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं।
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फसल नहीं खाती मधुमक्खियां, बढ़ाती हैं पैदावार: विनय

झज्जर जिले के मलिकपुर निवासी शहद उत्पादक व बी-ब्रीडर विनय फौगाट ने बताया कि मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देकर परागण क्रिया से फसलों की गुणवत्ता व पैदावार में भी बढ़ाई जाएगी। जागरूकता के अभाव में बहुत से किसान मधुमक्खी पालकों को अपने खेतों के पास डिब्बे नहीं रखने देते।

क्योंकि उनका मानना है कि मधुमक्खी फसल खा जाएगी, जबकि मधुमक्खियों से फसलों की पैदावार बढ़ती है। मधुमक्खी फसलों का सबसे बड़ा मित्र कीट है। एक एकड़ सरसों में मधुमक्खी के परागण से 3 से 4 क्विंटल तक सरसों की पैदावार बढ़ती है। इससे सरसों के तेल में 10 फीसदी तक सल्फर की मात्रा में वृद्धि होती है।

डिब्बे रामनगर और मधुमक्खियां विभाग से मिलेंगी
किसान को मधुमक्खी पालन के लिए डिब्बे मधुमक्खी पालन विकास केंद्र रामनगर से मिलेंगे, जबकि मधुमक्खियां बागबानी विभाग मान्यता प्राप्त बी-ब्रीडर से दिलाएगा। मधुमक्खी के एक डिब्बे में 50 से 60 हजार मधुमक्खी रखी जाती हैं। एक डिब्बे से 1 क्विंटल तक शहद उत्पादन लिया जा सकता है।
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इन मदों में इतनी अनुदान राशि

- बी ब्रीडर योजना के लिए 12.50 लाख पर 4 लाख रुपये
- 24 हजार रुपये प्रति मधुमक्खी कालोनी व 50 डिब्बों पर
- मधुमक्खी पालन उपकरण के लिए 40000 रुपये पर 50 फीसदी
- मधुमक्खी उत्पाद में 1.25 लाख रुपये पर 50 रुपये प्रति मधुमक्खी पालक
- मधुमक्खी पालन में महिलाओं को प्रशिक्षण, डिब्बे व उपकरण, 13.42 लाख रुपये पर 50 हजार रुपये प्रति समूह
- मधुमक्खी पालन उपकरणों की निर्माण इकाई, 20 लाख रुपये पर अधिकतम 8 लाख रुपये प्रति परियोजना
- कस्टमर हायरिंग केंद्र, 75 लाख रुपये पर 25 लाख रुपये प्रति परियोजना
- शहद व अन्य मधुमक्खी शीत भंडारण, 80 लाख रुपये पर अधिकतम 40 लाख रुपये प्रति परियोजना
- टेस्टिंग लैब, 1 करोड़ रुपये पर अधिकतम 50 लाख रुपये प्रति परियोजना
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