हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सभी डीसी को बाढ़ नियंत्रण की छोटी-छोटी योजनाओं पर कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। डीसी को संभावित बाढ़ स्थलों का व्यक्तिगत रूप से दौरा करना होगा। मानसून शुरू होने से पहले डीसी को लक्ष्य निर्धारित करते हुए उन्होंने शहरी एवं ग्रामीण ड्रेनों की सफाई करानी होगी।
बाढ़ नियंत्रण की योजनाओं और अन्य बाढ़ नियंत्रण उपायों पर 20 जून 2020 तक कार्य पूरा होना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने ये निर्देश वीडियो कांफ्रेंसिंग से वीरवार को दिए। वे बाढ़ नियंत्रण की तैयारियों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जिलों में 132.25 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 143 अल्पावधि योजनाओं पर कार्य चल रहा है। ड्रेनों से गाद निकालने के कार्य को हर कीमत पर 20 जून से पहले पूरा कर लिया जाए। विशेष रूप से यमुनानगर और करनाल जिलों में नदियों के तटों को सुदृढ़ करें ताकि बाढ़ की आशंका को रोका जा सके।
बैठक में बताया गया कि 833 शहरी एवं ग्रामीण ड्रेनों में से 588 ड्रेनों की सफाई के लिए पहचान की गई है। मनरेगा के तहत ड्रेनों की सफाई का कार्य तेजी से किया जा रहा है। 18 ड्रेनों का प्रबंधन एनएचएआई और रेलवे कर रहा है। डीसी को निर्देश दिए गए कि वे इन ड्रेनों की सफाई के लिए एनएचएआई और रेलवे के साथ समन्वय स्थापित करें।
522 अस्थायी स्थलों की पहचान
सीएम ने बताया कि लगभग 522 ऐसे अस्थायी स्थलों की पहचान की गई है, जहां जल संचय की संभावना है। पंप से पानी निकासी के लिए अस्थायी बिजली कनेक्शन मांगे गए हैं। नदी या नहर के तटों में कटाव की संभावना को रोकने के मद्देनजर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने संवेदनशील स्थलों की पहचान करने को कर्मचारियों का रोस्टर तैयार किया है। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को विशेष रूप से कैथल, कुरुक्षेत्र एवं रतिया में रिचार्जिंग शाफ्ट के निर्माण के लिए व्यापक योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।