कोरोना संक्रमण के कारण लगे लॉकडाउन में आबकारी विभाग की कड़की मई में दूर हुई। विभाग ने 32 करोड़ रुपये की कमाई कर डाली। लॉकडाउन के कारण अधिकारी 100 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान होने की संभावना जता रहे हैं। बता दें कि यूटी प्रशासन को आबकारी विभाग से प्रतिवर्ष 500 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है।
इस बार आबकारी विभाग ने वर्ष 2019 के मुकाबले 200 करोड़ रुपये अधिक राजस्व लाने का लक्ष्य तय किया था। मार्च में नई पॉलिसी समाप्त होने के दौरान ही लॉकडाउन लग गया था, जिसके कारण आबकारी विभाग को लगभग 100 करोड़ रुपये का अभी तक राजस्व नुकसान हो चुका है। दो माह की कड़की के बाद मई में आए राजस्व को लेकर अधिकारी बेहद खुश हैं।
तीन महीने एक्सटेंड करनी पड़ी पॉलिसी कोरोना के कारण चंडीगढ़ आबकारी विभाग को तीन माह एक्साइज पॉलिसी को एक्सटेंड करना पड़ा। वर्ष 2019-20 की पॉलिसी को 30 जून तक विभाग ने बढ़ाया है। अफसरों का कहना है कि नई पॉलिसी को लेकर जून के अंतिम सप्ताह में उच्चाधिकारियों के साथ चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
18 कारोबारी सरेंडर कर चुके हैं लाइसेंस लॉकडाउन के कारण बंद रही शराब की दुकानों से शराब का कारोबार करने वालों को भी भारी नुकसान हुआ है। नुकसान से उबरने के लिए 18 शराब लाइसेंसियों ने दुकानों के लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं। शहर में 92 शराब की दुकानें संचालित होती हैं। वर्तमान में सिर्फ 74 दुकानें ही संचालित हो रही हैं।
लॉकडाउन के कारण विभाग को राजस्व में नुकसान हुआ है। हालांकि अब हालात सामान्य हो रहे हैं। जल्द ही नई पॉलिसी को लेकर कार्य शुरू किया जाएगा।
- आरके चौधरी, असिस्टेंट एक्साइज कमिश्नर, चंडीगढ़