एक अप्रैल से शुरू हुई गेहूं की खरीद अभी तक सुचारु नहीं हो पाई है। बुधवार को हरियाणा अनाज मंडी एसोसिएशन ने आठ अप्रैल से हड़ताल की घोषणा कर दी है। ऐसे में गेहूं को बेचने में सबसे अधिक परेशानी किसानों को आएगी। इधर, मंगलवार को बिगड़े मौसम ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।
कृषि जानकार रणदीप आर्य का कहना है कि ऐसे हालात में किसानों की दिक्कत और बढ़ने वाली है। क्योंकि खरीद एजेंसी 12 प्रतिशत से अधिक नमी का गेहूं नहीं खरीदेगी और अभी गर्मी इतनी नहीं है कि 12 प्रतिशत नमी रह सके। इसलिए आने वाले दिन किसानों की परेशानी बढ़ाने वाले हैं। गौरतलब है कि इस बार प्रदेश में 80 लाख क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य है और प्रदेश में करीब 400 मंडियां व खरीद केंद्र हैं।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान का कहना है कि नमी की मात्रा 14 से घटाकर 12 प्रतिशत करना गलत है। इससे सीधे तौर पर किसान को नुकसान होगा। एक तो मौसम में लगातार नमी बनी हुई है, इससे गेहूं में भी नमी रहेगी। 12 प्रतिशत नमी के लिए किसानों को कई दिन तक इंतजार करना पड़ेगा। इससे उनकी परेशानी और बढ़ेगी। सरकार को तुरंत प्रभाव से ये फैसला वापस लेना चाहिए।
हमारे पास पूरे इंतजाम : जेपी दलाल
हमें उम्मीद है कि आढ़ती हड़ताल पर नहीं जाएंगे। कुछ आढ़तियों ने ही ऐसा कहा है, जबकि शेष सहयोग के लिए तैयार हैं। अगर ऐसी कोई बात होती है तो सरकार के पास किसानों का दाना-दाना खरीदना का पूरा इंतजाम हैं। अगर हड़ताल होगी तो नए लोगों को लाइसेंस दिए जाएंगे और नई कच्ची मंडी स्थापित की जाएंगी। सरकार किसान के साथ खड़ी है और किसान का दाना दाना खरीदा जाएगा।