हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए क्लेम कमिश्नर केसी पुरी की रिपोर्ट को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में पेश किया है। सरकार ने बताया कि अभी तक कमिश्नर के पास 425 क्लेम आएं हैं। इनके निपटारे की दिशा में काम किया जा रहा है। मामला 2010 में हुए आंदोलन के दौरान हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों की अवमानना से जुड़ा है। यह हलफनामा हरियाणा गृह विभाग के सचिव नितिन कुमार ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में पेश किया है।
हलफनामे में कहा गया है कि जाट आरक्षण आंदोलन के चलते नुकसान के क्लेम के लिए जस्टिस केसी पुरी आयोग का गठन किया गया है। मीडिया के माध्यम से प्रभावित लोगों को क्लेम के लिए पब्लिक नोटिस जारी किया गया। अभी तक क्लेम कमिश्नर के पास 425 मामले आए हैं। सरकार ने भी विभागों को इस मामले में सहयोग व क्लेम जारी करने में किसी भी तरह की बाधा न आने के निर्देश जारी किए हैं। क्लेम कमिश्नर ने सभी जिला पुलिस प्रमुखों से इनसे जुड़ी एफआईआर, मीडिया क्लिप या अन्य जानकारी तलब की है। क्लेम करने वालों को भी नोटिस जारी कर उनका पक्ष रखने को कहा गया है।
हाईकोर्ट में सरकार की तरफ से बताया गया कि सरकार मामले में गंभीर है और दोषियों के खिलाफ सख्ती से निपटेगी। जो लोग आंदोलन की आड़ में हिंसा भड़का रहे हैं, उनके खिलाफ सरकार सख्त है। पहले भी ऐसे कुछ लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। याचिका दाखिल करते हुए कहा गया था कि हाईकोर्ट ने हिंसा को काबू में करने और नुकसान की भरपाई दंगाइयों से करने के आदेश दिए थे। इन आदेशों का पालन नहीं किया गया। न ही किसी से वसूली की गई है। ऐसे मे सरकार को उचित निर्देश जारी किए जाएं।