औद्योगिक इकाइयों की नौकरियों में हरियाणा के युवाओं को 75 फीसदी आरक्षण देने का मामला सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सरकार को अब ये डर सताने लगा है कि यदि इस मसले पर औद्योगिक इकाइयों पर दबाव बनाया, तो इंडस्ट्री कहीं प्रदेश से पैकअप न कर जाए। आगे भी कहीं इससे प्रदेश में औद्योगिक निवेश भी प्रभावित न हो जाए। इसलिए सरकार अब इस मसले पर बीच का रास्ता तलाश रही है।
इस मुद्दे पर फैसला लेते हुए प्रदेश सरकार को ये भी देखना है कि उनका सहयोगी दल जननायक जनता पार्टी (जजपा) और प्रदेश का युवा भी नाराज न हो, क्योंकि इसी मांग को लेकर जजपा ही सबसे ज्यादा पैरवी में जुटी हुई है। बहरहाल, सरकार इस मसले पर अभी मंथन मोड में है। बताते चलें कि जजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान इस वादे को अपने घोषणा पत्र में प्रमुखता से शामिल किया था। चूंकि अब जजपा हरियाणा सरकार में भाजपा की सहयोगी है, इसलिए जजपा अपनी इस घोषणा को पूरा करने के लिए गठबंधन सरकार पर दबाव बना रही है।
गठबंधन सरकार के मिनिमम कॉमन एजेंडे में भी इस मांग को प्रमुखता से शामिल किया गया है। हालांकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सदन में यह दावा किया है कि सरकार इस वादे से पीछे नहीं हट रही है, मगर इस पर फैसला लेने से पहले विभिन्न पहलुओं पर समीक्षा की जाएगी। सीएम ने कहा कि हरियाणा के युवाओं को प्रदेश के उद्योगों में सुनिश्चित रोजगार मिले, इसे लेकर सरकार पूरी तरह चिंतित और गंभीर है। लिहाजा इस मसले पर भी जल्द निर्णय लिया जाएगा।
सीएम ने यह भी साफ किया कि इस मुद्दे पर प्रदेश में मौजूदा इंडस्ट्री पर ज्यादा दबाव नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि ऐसा करने से उद्योग सूबे से पैकअप भी कर सकते हैं। इसलिए साकारात्मक ढंग से बीच का रास्ता निकले, इस पर काम चल रहा है। उधर, प्रदेश सरकार को अपने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रैकिंग की भी चिंता है। अभी इस रैकिंग में हरियाणा उत्तर भारत में पहले व देश में तीसरे स्थान पर है। उद्योगाें पर किसी भी तरह का दबाव, इस रैंकिंग को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए सरकार अभी ज्यादा जल्दबाजी में नहीं है।