हरियाणा में इस बार के सीजन में गन्ने का रेट नहीं बढ़ाया जाएगा। इस बार मिलों में किसानों से पुराने रेट पर ही गन्ने की खरीद की जाएगी। इसके अलावा किसानों को गन्ने की पेमेंट समय पर मिले, कोई बकाया न रहे, इसके लिए सभी प्राइवेट और सहकारी चीनी मिलों को एडवांस सब्सिडी भी भेजी जा चुकी है, ताकि गन्ना बेचने के तुरंत बाद किसानों को पेमेंट मिल जाए। हरियाणा में गन्ने पिराई का सीजन शुरू चुका है। प्रदेश में 11 सहकारी और 3 प्राइवेट चीनी मिले हैं। पलवल मिल को छोड़कर अन्य मिलों में पिरोई का काम शुरू हो चुका है।
इस मिल में भी पिराई 12 दिसंबर से शुरू होने का दावा किया जा रहा है। पिराई सीजन शुरू होने से पहले ही किसानों ने इस बार भी गन्ने का रेट बढ़ाए जाने की मांग बुलंद कर रखी है। भारतीय किसान यूनियन इस मुद्दे लगातार उठा रही है और इसके लिए केन कमिश्नर समेत अन्य संबंधी अधिकारियों से भी मिल चुकी है। उधर, गन्ना खरीद का सरकारी रेट बढ़ाने को लेकर सरकारी स्तर पर भी कशमकश जारी थी। मगर अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि गन्ना की खरीद मिलों में पुराने रेट पर ही की जाएगी।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल ने बताया कि इस संबंध में निर्णय लिया जा चुका है और संबंधित निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। उनके अनुसार हरियाणा में गन्ने का रेट रीजन ही नहीं, बल्कि देश में सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से गन्ने की एफआरपी (फेयर एंड रेमोनरेटिव प्राइज) 275 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है, जबकि हरियाणा में विभिन्न कैटेगरी में गन्ने का ये रेट 330 (पछेेती), 335 (मध्यम) व 340 (अगेती) रुपये प्रति क्विंटल है, जो कि सर्वाधिक है। उनके अनुसार गन्ना की पेमेंट भी किसानों को समय पर मिले, इसे लेकर भी इस बार सरकार बहुत ज्यादा गंभीर है।
मिलों को एडवांस भेजी 174 करोड़ की सब्सिडी
इस सीजन में किसानों को पेमेंट संबंधी किसी प्रकार की दिक्कत न हो, सरकार ने इसका खास ध्यान रखा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल बताते हैं कि इसके सभी लिए चीनी मिलों को 233 करोड़ की एडवांस सब्सिडी पेमेंट भेज दी गई है। इसमें 104 करोड़ की सब्सिडी सहकारी मिलों, 69 करोड़ की सब्सिडी प्राइवेट मिलों को भेजी गई है।
इन प्राइवेट मिलों में 35 करोड़ की सब्सिडी सरस्वती शुगर मिल, 19 करोड़ नारायणगढ़ बनौंदी शुगर मिल व 15 करोड़ भादसूं स्थित पिकादली शुगर मिल को भेजी गई है। इसके अलावा प्राइवेट नारायणगढ़ शुगर मिल के लिए 60 करोड़ के अतिरिक्त लोन की व्यवस्था भी की गई है, ताकि वे किसानों का बकाया चुका सके।
डीसी अंबाला को इस मिल का चेयरमैन और हरको बैंक के एमडी को मिल का डायरेक्टर फाइनेंस नियुक्त कर दिया गया है। उधर, सहकारी मंत्री डा. बनवारी लाल पहले ही स्पष्ट कर चुकेहैं कि सहकारी मिलों की तरफ किसानों की अब कोई बकाया पेमेंट नहीं है।
उधर, रेट बढ़ाने को लेकर किसान आंदोलन पर अड़े
हालांकि सरकार मौजूदा सीजन में गन्ने के रेट पर अपना स्टैंड क्लीयर कर चुकी है। मगर भारतीय किसान यूनियन इस मांग को लेकर आंदोलन की जिद पर अड़ा हुआ है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने बताया कि किसान इस बार गन्ने का रेट 400 रुपये प्रति क्विंटल की मांग काफी समय से कर रहे हैं।
इसी को लेकर अब किसानों ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है। उनके अनुसार प्रदेश में गन्ने के दामों में बढ़ोतरी को लेकर अब बुधवार को दोपहर 12 बजे पंचकूला के माजरी चौंक से लेकर कृषि विभाग के निदेशक एवं केन कमिश्नर के कार्यालय तक भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले रोष मार्च निकाला जाएगा।
उसके बाद कार्यालय के समक्ष ही विरोध स्वरूप प्रदेश के काफी किसान एकत्रित होकर प्रतीकात्मक गन्ने की फसल की होली जलाएंगे। उनके अनुसार एक ओर तो सरकार किसानों की आय बढ़ाने का दावा कर रही है, मगर दूसरी ओर इस सीजन में अभी तक गन्ने का रेट बढ़ाने को लेकर उदासीनता दिखाई जा रही है।