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मंत्रियों में बंटे विभाग, पढ़ें किसे क्या मिला?

Wed, 29 Oct 2014 05:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कैबिनेट के गठन के बाद हरियाणा में चल रही ऊहापोह मंगलवार देर रात समाप्त हो गई। दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के मिलकर लौटे हरियाणा के नए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मंत्रियों में विभागों का बंटवारा कर दिया।
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मुख्यमंत्री ने अपने पास सबसे ज्यादा 18 विभाग रखे हैं। उनके अलावा सबसे ज्यादा विभागों का जिम्मा पाने वाले कैप्टन अभिमन्यु (13) और राम बिलास शर्मा (9) हैं।

विभागों के बंटवारे के साथ ही खट्टर सरकार में कैप्टन अभिमन्यु नंबर दो बनकर उभरे हैं। उन्हें वित्त, कराधान, उद्योग जैसे महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए हैं वहीं राम बिलास शर्मा के हाथ शिक्षा और परिवहन जैसे विभाग ही आए हैं।
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अमित शाह से 1 घंटे की माथापच्ची

मुख्यमंत्री बनने के बाद मंगलवार को पहली बार दिल्ली आए मनोहर लाल खट्टर ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ करीब एक घंटे की माथापच्ची के बाद मंत्रियों की जिम्मेदारी तय कर ली।

चर्चा है कि विभागों के बंटवारे के साथ-साथ राज्य में पार्टी के नए अध्यक्ष और विधानसभा अध्यक्ष के नाम पर भी चर्चा के बाद सहमति बनी। खट्टर, शाह के साथ चर्चा करने के साथ ही तत्काल चंडीगढ़ रवाना हो गए। दोनों नेताओं के बीच अकेले में चर्चा हुई।

बीते रविवार को मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल में छह कैबिनेट और तीन राज्यमंत्रियों ने शपथ ली थी। लेकिन मंत्रियों में विभागों का बंटवारा नहीं किया गया था। सोमवार को विभागों के बंटवारे के बिना ही खट्टर ने नई सरकार के मंत्रिमंडल की पहली बैठक बुलाई।

मंत्रियों के विभाग सहित अन्य मसलों पर बातचीत करने के लिए खट्टर मंगलवार की सुबह पार्टी मुख्यालय पहुंचे और शाह के साथ करीब एक घंटे तक चर्चा की।

इन्हें मिला ये विभाग

सीएम खट्टर ने अपने पास गृह मंत्रालय, बिजली, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, खनन एवं भू विज्ञान, सामान्य प्रशासन, विज्ञान एवं तकनीक, स्थानीय निकाय, पुरातत्व, आर्किटेक्चर सहित 18 विभाग रखे हैं।

कैप्टन अभिमन्यु: वित्त एवं राजस्व, आपदा प्रबंधन, आबकारी एवं कराधान, योजना, वन एवं पर्यावरण, उद्योग, वाणिज्य, श्रम एवं रोजगार, कानून, चकबंदी सहित 13 विभाग।

रामबिलास शर्मा: शिक्षा, परिवहन, तकनीकी शिक्षा, खाद्य एवं आपूर्ति, पर्यटन, संसदीय कार्य सहित 9 विभाग।

ओपी धनखड़: कृषि एवं सिंचाई और इससे जुड़े पांच विभाग।

राव ‌नरबीर सिंह: लोक निर्माण विभाग और जन स्वास्थ्य विभाग।

कविता जैन: सामाजिक कल्याण एवं सशक्तिकरण, महिला एवं बाल विकास सहित तीन विभाग।

विक्रम सिंह ठेकेदार: सहकारिता (स्वतंत्र प्रभार), मुद्रण एवं लेखन (स्वतंत्र प्रभार) सहित तीन विभाग।

अनिल विज: स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, खेल एवं युवा मामले सहित पांच विभाग।

कृष्ण कुमार बेदी: सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण सहित तीन विभाग।

करण देव कांबोज: खाद्य एवं आपूर्ति विभाग समेत चार विभाग। (संबंधित मंत्रियों से अटैच)

13 भारी भरकम विभाग सौंपे अभिमन्यु को

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कैप्टन अभिमन्यू को अपने बाद सबसे ज्यादा विभाग देकर 'सुपर सीएम' बनाया है। इसके पीछे कई सच छिपे होने बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि हरियाणा में खट्टर मंत्रिमंडल के शपथ लेने के तीसरे दिन मंत्रियों के विभागों का बंटवारा हो ही गया।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गृह और बिजली समेत 18 महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे। विभाग वितरण के बाद जाट नेता कैप्टन अभिमन्यु सरकार में सुपर सीएम बनकर उभरे हैं।

वित्त, राजस्व, आबकारी एवं कराधान जैसे 13 भारी भरकम विभाग देकर कैप्टन को ताकत दी गई है। वहीं सरकार में वरीयता के लिहाज से नंबर दो कहे जा रहे रामबिलास शर्मा को शिक्षा और परिवहन जैसे विभागों से संतोष करना पड़ा है।

गैर जाट का जाट को ताकत देने का संकेत

संभवत: गैर जाट सीएम बनाए जाने पर एक जाट नेता को ताकत देने का संकेत दिया गया है। विभागों की संख्या के मामले में कैप्टन अभिमन्यु सीएम के बाद नंबर दो के रूप में उभरे हैं।

अंबाला छावनी से विधायक एवं कैबिनेट मंत्री अनिल विज का जिस तरह से सरकार में कद समझा जा रहा था। वैसा कुछ भी नहीं हुआ। विज को सरकार ने स्वास्थ्य मंत्रालय और चिकित्सा शिक्षा तक सीमित कर दिया है।

अभिमन्यु को महकमों के वितरण में मिले महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूर्व की हुड्डा सरकार के पहले कार्यकाल में सीएम हुड्डा के खास दोस्त विनोद शर्मा को आबकारी एवं कराधान मंत्रालय मिला था। शर्मा की गिनती उस समय सुपर सीएम के तौर पर होती थी।
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10 सालों में किसी को नहीं मिले इतने विभाग

हरियाणा में पिछले एक दशक की सरकार में यह अहम मंत्रालय किसी एक मंत्री के पास नहीं रहे हैं। जितने कि अब कैप्टन अभिमन्यु के पास आए हैं। इतिहास इस बात का गवाह है कि अब तक जिसे वित्त मंत्रालय दिया जाता था।

उसके पास इसके अलावा एक या दो ही महत्वपूर्ण मंत्रालय होते थे। हुड्डा के पहले कार्यकाल में बीरेंद्र सिंह जैसे कद्दावर नेता को आबकारी एवं कराधान मंत्रालय वित्त के साथ दिया गया था।

वह भी विनोद शर्मा के इस्तीफे के बाद दिया गया था। इसे कैप्टन अभिमन्यू की हाईकमान में पकड़ कहें या अमित शाह के साथ बेहतर संबंध कि वे इतने महत्वपूर्ण मंत्रालय में हासिल कर चुके हैं।
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