हरियाणा सरकार ने चौटाला शासनकाल में हुई 65 एचसीएस अधिकारियों की भर्ती में गड़बड़ी की बात स्वीकार कर ली है। हालांकि, सरकार किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है कि इस मामले में क्या किया जाना है।
हाईकोर्ट ने सरकार के इस रवैये को गंभीरता से लिया है। अब वीरवार को बेंच सभी वादी व प्रतिवादियों का पक्ष सुनेगी।
जस्टिस राजीव भल्ला व जस्टिस बीएस वालिया की डिवीजन बेंच के निर्देश के मुताबिक याचिकाकर्ता के वकील कमलजीत सिंह ने 195 उम्मीदवारों के अंकों की सूची पेश की। बेंच ने एचपीएससी से पूछा कि क्या आयोग के सभी सदस्यों की ओर से इंटरव्यू में उम्मीदवारों को अलग-अलग अंक देने का प्रावधान था या साझा अंक दिए जाने थे।
बेंच ने आयोग से यह इस कारण पूछा है, क्योंकि अंकों की लिखावट एक है, लेकिन इन अंकों के आगे हस्ताक्षर भिन्न-भिन्न हैं। इसी बीच सरकार से पूछा गया कि सरकार किस नतीजे पर पहुंची है। सरकारी वकील ने कहा कि भर्ती में गड़बड़ी हुई है, लेकिन इस मामले में क्या किया जाना है, इस बारे में बेंच के सवाल का जवाब सरकारी वकील नहीं दे पाए। उल्लेखनीय है कि बेंच कह चुकी है कि नौ साल तक जांच लंबित रखना अपने आप में घोटाला है।
बेंच ने इस मामले के सभी याचिकाकर्ता एवं प्रतिवादियों को वीरवार को अपना पक्ष रखने को कहा है। मंगलवार को सरकार ने एसआईटी की अब तक की जांच रिपोर्ट भी सीलबंद लिफाफे में पेश की थी।
बेंच ने रिपोर्ट खोली, लेकिन साथ ही टिप्पणी की थी कि इसमें केवल प्रकरण और अनियमितताओं की प्रक्रिया का उल्लेख है, लेकिन एसआईटी किस नतीजे पर पहुंची, यह नहीं बताया गया। बेंच ने इंटरव्यू की अंकतालिका भी पढ़ी और एचपीएससी के वकील से सवाल पूछा था कि इस पर आयोग चेयरमैन के हस्ताक्षर क्यों नहीं हैं।