फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टिकट बंटवारे के बाद भाजपा में असंतोष

Mon, 22 Sep 2014 05:31 PM IST
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
हरियाणा में भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव की तरह डगर आसान नहीं है। लोकसभा चुनाव में विरोध अधिक नहीं था, पार्टी कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि लोकसभा में उम्मीदवारों की मदद में जुटने का सिला विधानसभा में पार्टी टिकट से नवाज कर देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
विज्ञापन


अब भाजपा की दूसरी सूची में भी बगावत के सुर उतने ही तेज हैं, जितने की पहली सूची में थे। प्रदेश अध्यक्ष रामबिलास शर्मा के विरोध से शुरू हुआ यह दौर कृष्णपाल गुर्जर का पुतला फूंके जाने तक पहुंच गया है।

पहली सूची के बाद प्रशासन को विरोध के कारण रामबिलास के आवास पर सुरक्षा मुहैया करवानी पड़ी थी। अब चुनाव से पहले पार्टी की इस स्थिति को अपने पक्ष में कैश करवाने में विपक्ष एक भी मौका चूक नहीं रहा है।
विज्ञापन

भाजपा में होने लगी टूट-फूट

फरीदाबाद से भाजपा नेता एवं पूर्व विधायक चंद्र भाटिया ने अपने समर्थकों के साथ इनेलो का दामन थाम लिया है। थानेसर हलके के गांव कसरैला से कई भाजपा कार्यकर्ता इनेलो में शामिल हो गए हैं।

अंबाला शहर से टिकट के दावेदार पूर्व विधायक जसबीर मलौर ने सोमवार को कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई है। यहां से पार्टी ने असीम गोयल को टिकट दिया है। मुलाना में संतोष सारवान को टिकट दिए जाने का विरोध है। कलायत से भाजपा ने बिरेंद्र सिंह के समर्थक धर्मपाल शर्मा को मैदान में उतारा है, लेकिन उनको टिकट दिए जाने का विरोध हो रहा है।

फरीदाबाद में प्रवेश मेहता ने पार्टी छोड़ दी है। मेहता पुराने भाजपाई हैं, उन्होंने पिछला चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ा था। पानीपत से भाजपा किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्ष सतपाल रोड़ ने पद छोड़ दिया है।

इसके अलावा पार्टी में टिकट वितरण के बाद तोशाम, फतेहाबाद, पिहोवा, कुरुक्षेत्र और कालका सीटों पर भी विरोध के स्वर उठ रहे हैं।
विज्ञापन

परिवारवाद से बच नहीं सकी पार्टी

भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं ने आक्रोश के स्वर तेज कर दिए हैं। टिकट वितरण में धन्ना सेठों को तवज्जो मिलने के बाद पार्टी के कैडर में भी नाराजगी है। दलबदलुओं पर भरोसा भी पार्टी में सिर फुटव्वल का कारण बन गया है।

जाट नेताओं को खुलकर टिकट बांटा गया है, लेकिन जाट नेता के तौर पर कोई बड़ा चेहरा पार्टी ने आगे नहीं किया है। बीरेंद्र सिंह कांग्रेस को अलविदा कहकर भाजपा में शामिल जरूर हुए हैं, लेकिन टिकट बंटवारे में उनकी अनदेखी कहीं से छिपी नहीं है।

भाजपा हरियाणा में परिवारवाद से नहीं बच सकी है। पार्टी ने हरियाणा के सांसदों को भले ही टिकट वितरण से दूर रखा, लेकिन सुषमा स्वराज की बहन, रामबिलास शर्मा के समधी और बीरेंद्र सिंह की पत्नी को टिकट दिया है। कैलाश विजयवर्गीय का तर्क है सुषमा हरियाणा में राजनीति नहीं करती हैं और रामबिलास के समधी पार्टी के कार्यकर्ता हैं।

कैलाश विजयवर्गीय, चुनाव प्रभारी, हरियाणा ने बताया कि जो विरोध हो रहा है इतना अपेक्षित है, लेकिन कोई खास विरोध नहीं हो रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह स्वयं घटनाक्रम पर नजर रखे हैं। जहां कार्यकर्ताओं में असंतोष है, उन्हें हम समझा बुझाकर शांत कर लेंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें