माना जा रहा है कि बेटे बृजेंद्र सिंह ने हिसार से टिकट कटने के आसार देखते हुए भाजपा छोड़ी थी। वह कांग्रेस से इसी सीट से टिकट चाहते हैं। हालांकि, कांग्रेस ने अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया है।
चौधरी बीरेंद्र सिंह का उचाना, जींद, कैथल समेत बांगर बेल्ट में खासा प्रभाव है। वह बांगर क्षेत्र की राजनीति करते रहे हैं और हलके में सीएम पद लाने को लेकर संघर्ष करते रहे हैं। हालांकि, कई बार मौका मिलते-मिलते रह गया। इसलिए उनको राजनीति में ट्रेजडी किंग के नाम से जाना जाता है। बीरेंद्र सिंह की घर वापसी से कांग्रेसी उत्साहित हैं। हालांकि, लोकसभा चुनावों के परिणाम ही तय करेंगे कि बीरेंद्र सिंह के आने से कांग्रेस को फायदा हुआ या नहीं।
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दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि उनकी विचारधारा की वापसी है। भाजपा में शामिल होते समय यह अंदाजा था कि दोनों पार्टियों की विचारधारा में भिन्नता होगी, लेकिन कई मुद्दों पर इतना भारी अंतर होगा, इसका अनुभव बाद में हुआ।
चौधरी बीरेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि भले ही चुनावी राजनीति न करें, लेकिन जहां तक संभव होगा सक्रिय रहकर काम करेंगे। भाजपा के 400 पार के नारे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह अजूबा हो सकता है, वरना संभव नहीं है। वर्तमान हालात में भाजपा 200 पार कर ले तो बड़ी बात होगी।
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जजपा से गठबंधन की वजह से थे नाराज
बीरेंद्र सिंह ने कहा कि महीना भर पहले ही उन्होंने भाजपा से कहा था कि जजपा से गठबंधन न तोड़ा तो वह भाजपा छोड़ देंगे और उन्हें लगता है कि भाजपा ने इसमें देरी की है।