हरियाणा को अस्तित्व में आए आज 51 साल हो गए हैं। इन 51 सालों में प्रदेश ने कई उपलब्धियां हासिल कीं तो कई मोर्चों पर विफल भी रहा। पचास वर्ष से एक कदम आगे बढ़ चुके हरियाणा ने अपने गठन के बाद से अब तक अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। बावजूद इसके हरि की नगरी हरियाणा के विकास का पहिया बिल्कुल नहीं रुका। प्रदेश मजबूत आर्थिक स्थिति के साथ अपने पैरों पर खड़ा है।
सरकार कर्ज कम कर वित्तीय स्थिति और सुदृढ़ करने के इरादे के साथ आगे बढ़ रही है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय, राष्ट्रीय से भी ज्यादा है। आर्थिक विकास दर मंदी के दौर में बेशक कुछ कम हुई, लेकिन इस वित्तीय वर्ष में फिर से उछाल आने की संभावना सरकार ने जताई है। विकास के नए आयाम स्थापित करने वाले इस प्रदेश के सामने अनसुलझे सवाल भी कम नहीं हैं। प्रगति हुई है तो चुनौतियां भी बढ़ी हैं।
1966 में अपने गठन के बाद से प्रदेश अब तक न तो अपनी अलग राजधानी बना पाया, न ही अलग हाईकोर्ट। नहरी पानी के बंटवारे पर पेच बरकरार है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बावजूद हरियाणा की जीवनरेखा मानी जाने वाली एसवाईएल का निर्माण अभी तक अधर में है। इसे लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच गठन के बाद से ही तलवारें खिंची हुई हैं। पंजाब पानी की एक बूंद देने को तैयार नहीं तो हरियाणा अपना हक लेने को प्रतिबद्ध। ताकि दक्षिणी हरियाणा का किसान व इंसान खुशहाल हो सके।
प्रदेश में बीते तीन साल में हुई हिंसक घटनाओं ने शर्मसार भी किया है। इससे प्रदेश की छवि पर विपरीत असर भी पड़ा। आपसी सौहार्द बिगड़ा और आज भी स्थिति यह है कि जाट और नॉन जाट के रिश्तों बीच आई दरार भर नहीं पाई है। जनता में विश्वास बहाली भी सरकार के समक्ष बड़ी चुनौती है।
हरियाणा की विकास यात्रा भी लंबी नहीं है
Haryana cm Manohar Lal Khattar
प्रदेश की विकास यात्रा लंबी नहीं है, लेकिन इसने तेजी से कदम दर कदम सफलता के जो पड़ाव पार किए हैं, वे बेमिसाल हैं। यह वही भूमि है, जहां आर्यों ने पहला स्तोत्र गाया। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया। यह भूमि महाभारत जैसे युग परिवर्तक युद्ध के साथ ही उत्तर मध्यकाल में भारत के इतिहास पर अमिट प्रभाव छोड़ने वाली पानीपत की तीन लड़ाइयों का गवाह रही। हरि अयन (विष्णु निवास) नाम से पहचान रखने वाला यह इलाका कई उतार-चढ़ाव के बाद 1 नवंबर 1966 को हरियाणा नाम से अलग राज्य बना।
चंदगीराम, सुशील कुमार, योगेश्वरदत्त, गीता, बबीता जैसी पहलवान, बॉक्सर बिजेंद्र, मनोज कुमार, सर छोटूराम और चौधरी देवीलाल जैसे जननायक देने वाली इस धरा के वीरों ने देश की रक्षा में अतुल्य योगदान दिया है। इस माटी से जन्मे रागिनी गायक लखमीचंद, मेहरसिंह लोक संस्कृति के वाहक बने, वहीं अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला, सरीखी अनेक प्रतिभाओं ने अपने राज्य के साथ ही देश का मान भी बढ़ाया है।
क्या पाया
प्रति व्यक्ति आय विकास दर 7.2, राष्ट्रीय 5.9, औद्योगिक विकास, खेलों के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम, अंतरिक्ष में पहुंची कल्पना चावला, पढ़ी-लिखी पंचायत, लिंगानुपात में सुधार, केरोसीन फ्री
क्या खोया
भाईचारा, देशी व विदेशी निवेश, दूसरे राज्यों में गए निवेशक, साफ-सुथरा वातावरण, शुद्ध पानी
पांच बड़ी चुनौतियां
एसवाईएल का निर्माण, अलग राजधानी, अलग हाईकोर्ट, वित्तीय स्थिति और सुधारना, सात लाख घरों में बिजली पहुंचाना
तीन बड़ी घटनाएं:
- जाट आरक्षण आंदोलन में 32 लोगों की मौत, हिंसा की आग में जला हरियाणा
- पंचकूला हिंसा, डेरामुखी प्रकरण में 42 लोगों की मौत। करोड़ों का नुकसान।
- संत रामपाल आश्रम करौंथा में हिंसा, 6 लोगों की मौत
1955 में उठी थी हरियाणा की मांग
Haryana cm Manohar Lal Khattar
संयुक्त पंजाब से हरियाणा को अलग राज्य बनाने की मांग पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों के शासनकाल में प्रमुखता से उठी थी। 15 अगस्त 1947 को भारत के अंग्रेजी हुकूमत से आजाद होने के वक्त हरियाणा पंजाब प्रांत का हिस्सा था। 1949 में पंजाब के मुख्यमंत्री भीमसेन सच्चर के शासनकाल में पंजाब प्रांत की भाषा को लेकर विरोध उत्पन्न हो गया। हिंदी भाषी क्षेत्रों में पंजाबी बढ़ाने का विरोध हुआ, परिणाम स्वरूप इसके समाधान के लिए सच्चर फार्मूला बनाया गया।
पहली अक्टूबर 1949 को सच्चर फार्मूले को लागू कर दिया गया, इस फार्मूले के अनुसार पंजाब को पंजाबी क्षेत्र व हिंदी क्षेत्र में बांट दिया गया। 1955 में प्रदेश की सीमा निर्धारित करने रोहतक आए आयोग के समक्ष हरियाणा के कांग्रेस विधायकों ने पृथक हरियाणा राज्य की मांग रखी। पंजाब के प्रताप सिंह कैरों के शासनकाल (1956-64) के दौरान ही पृथक हरियाणा की मांग ने जोर पकड़ा।
भारतीय संविधान में संशोधन (17 वा संशोधन 1956) होने के बाद राष्ट्रपति की आज्ञा से 24 जुलाई 1956 को पंजाब सरकार ने क्षेत्रीय फार्मूला राज्य में लागू कर दिया। प्रताप सिंह कैरों ने इसे पूरी तरह सफल होने के अवसर नहीं दिए। इससे क्षेत्रीय योजना असफल हो गई। 23 सितंबर 1965 को लोगों के दबाव में सरकार ने विभाजन के लिए सरदार हुकुम सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया।
कमेटी के फैसले को सही मानते हुए भारत के गृह राज्य मंत्री ने संसद के दोनों सदनों में पंजाब के पुनर्गठन के संबंध में संसदीय समिति के गठन संबंधी निर्णय की घोषणा कर दी। हुकुम सिंह कमेटी की सिफारिशों को मानते हुए सरकार ने 23 अप्रैल 1966 को जेसी शाह की अध्यक्षता में सीमा आयोग का गठन किया। 18 सितंबर 1966 को पंजाब पुनर्गठन विधेयक पारित कर दिया गया तथा 1 नवंबर 1966 को पृथक हरियाणा राज्य के रूप में हरियाणा की स्थापना हुई। हरियाणा देश के 17वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
हरियाणा के अस्तित्व में आने की प्रक्रिया ऐसी रही
Haryana CM Manohar lal Khattar
23 सितंबर 1965
संसदीय समिति की सिफारिश पर भारत सरकार ने सरदार हुकुम सिंह कमेटी गठित की।
23 अप्रैल 1966
समिति की सिफारिश पर भारत सरकार ने जस्टिस जेसी शाह की अध्यक्षता में पंजाब-हरियाणा सीमा निर्धारण के लिए आयोग गठन किया।
31 मई 1966
शाह आयोग ने रिपोर्ट सौंपी। इसमें हिसार, रोहतक, गुड़गांव, करनाल और महेंद्रगढ़ जिले के अलावा पंजाब के संगरूर जिले की तहसील जींद, नरवाना और नारायणगढ़, अंबाला, जगाधरी को भी हरियाणा में शामिल किया गया। नरवाना को जींद और नारायणगढ़ व जगाधरी को अंबाला जिले में शामिल किया गया।
18 सितंबर 1966
शाह आयोग की रिपोर्ट के आधार पर भारत सरकार ने पंजाब पुनर्गठन बिल 1966 पास किया, जिसके आधार पर हरियाणा की सीमा का निर्धारण हुआ।
01 नवंबर 1966
हरियाणा राज्य का गठन। इसमें सात जिले थे। हिसार, रोहतक, गुड़गांव, करनाल, महेंद्रगढ़, जींद व अंबाला। पिंजौर क्षेत्र को भी अंबाला में शामिल किया गया। दोनों राज्यों की संयुक्त हाईकोर्ट बनाई।
हरियाणा के पूर्व राज्यपाल और उनका कार्यकाल
गवर्नर कप्तान सिंह सोलंकी
- फोटो : फाइल फोटो
1. धर्मवीर 1 नवंबर 1966 से 14 सितंबर 1967
2. वीरेंद्र नारायण चक्रवर्ती 15 सितंबर 1967 से 26 मार्च 1976
3. रणजीत सिंह नरूला 27 मार्च 1976 से 13 अगस्त 1976
4. जय सुख लाल हाथी 14 अगस्त 1976 से 23 सितंबर 1977
5. हरचरण सिंह बराड़ 24 सितंबर 1970 से 9 दिसंबर 1979
6. सुरजीत सिंह संधवालिया 10 दिसंबर 1979 से 27 फरवरी 1980
7. गणपत देव जी तपासे 28 फरवरी 1980 से 13 जून 1984
8. सय्यद मुजफ्फर हुसैन बरोनी 14 जून 1984 से 21 फरवरी 1981
9. हरि आनंद बरारी 22 फरवरी 1988 से 6 फरवरी 1990
10. धनिकलाल मंडल 7 फरवरी 1990 से 13 जून 1995
11. महावीर प्रसाद 14 जून 1995 से 18 जून 2000
12. बाबू परमानंद 19 जून 2000 से 1 जुलाई 2004
13. ओम प्रकाश वर्मा 2 जुलाई 2004 से 7 जुलाई 2004
14. मो. एआर किदवई 7 जुलाई 2004 से 27 जुलाई 2009
15. जगन्नाथ पहाडिय़ा 27 जुलाई 2009 से 26 जुलाई 2014
16. कप्तान सिंह सोलंकी (वर्तमान) 27 जुलाई 2014 से अब तक
हरियाणा राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और उनका कार्यकाल
Manohar Lal Khattar
- फोटो : File Photo
1. भगवत दयाल शर्मा 1 नवंबर 1966 से 23 मार्च 1967
2. राव विरेंद्र सिंह 24 मार्च 1967 से 20 नवंबर 1967
-राष्ट्रपति शासन लागू हुआ 21 नवंबर 1967 से 21 मार्च 1968
3. बंसीलाल 22 मई 1968 से 30 नवंबर 1975
4. बनारसी दास गुप्ता 1 दिसंबर 1973 से 30 अप्रैल 1977
- राष्ट्रपति शासन लागू हुआ 30 अप्रैल 1977 से 21 जून 1977
5. देवी लाल 21 जून 1977 से 28 जून 1979
6. भजनलाल 29 जून 1979 से 4 जून 1986
7. बंसीलाल 5 जून 1986 से 19 जून 1987
8. देवी लाल 17 जुलाई 1987 से 1 दिसंबर 1989
9. ओमप्रकाश चौटाला 2 दिसंबर 1989 से 22 मई 1990
10. बनारसी दास गुप्ता 23 मई 1990 से 11 जुलाई 1990
11. ओम प्रकाश चौटाला 12 जुलाई 1990 से 17 जुलाई 1990
12. हुकुम सिंह 17 जुलाई 1990 से 22 मार्च 1991
13. ओमप्रकाश चौटाला 23 मार्च 1991 से 6 अप्रैल 1991
- राष्ट्रपति शासन लागू हुआ 6 अप्रैल 1991 से 23 जून 1991 तक
14. भजनलाल 23 जून 1991 से 10 मई 1996
15. बंसीलाल 11 मई 1996 से 23 जुलाई 1999
16. ओमप्रकाश चौटाला 24 जुलाई 1999 से 4 मार्च 2005
17. भूपेंद्र सिंह हुड्डा 5 मार्च 2005 से 26 अक्टूबर 2014
18. मनोहर लाल खट्टर 26 अक्तूबर 2014 से अब तक