सीएम मान ने तीन अक्तूबर को लिखा था पत्र
पंजाब के मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ठीक एक दिन पहले तीन अक्तूबर को मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखा था और इस मुद्दे को लेकर बैठक करने के लिए समय मांगा था। इस पत्र पर हरियाणा सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं गया। इससे पहले दोनों के बीच आखिरी बार पिछले साल 14 अक्तूबर को द्विपक्षीय बैठक हुई थी। इसके बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने चार जनवरी 2023 को दूसरे दौर की चर्चा की, जिसमें दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे। तीन बार की बैठकों में दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई थी।
हरियाणा को यह हो रहा है नुकसान
पंजाब में एसवाईएल का निर्माण नहीं होने से हरियाणा को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस पानी के न मिलने से दक्षिणी-हरियाणा में भूजल स्तर भी काफी नीचे चला गया है। इस वजह से किसान डीजल का इस्तेमाल और बिजली से नलकूप चलाकर सिंचाई करते हैं, जिससे उन्हें हर वर्ष 100 करोड़ रुपये से लेकर 150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ता है।
सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से 10 लाख एकड़ क्षेत्र को सृजित सिंचाई क्षमता बेकार पड़ी है। इससे हरियाणा को हर वर्ष 42 लाख टन खाद्यान्नों की भी हानि उठानी पड़ती है। 1981 के समझौते के अनुसार 1983 में एसवाईएल बन जाती तो हरियाणा 130 लाख टन अतिरिक्त खाद्यान्नों व दूसरे अनाजों का उत्पादन करता। 15 हजार प्रति टन की दर से इस कृषि पैदावार का कुल मूल्य 19,500 करोड़ रुपये बनता है।