भाजपा का यह प्रयास कश्मीर घाटी में देश व नागरिकों की सुरक्षा में शहीद हुए जवानों को सच्ची श्रद्धांजलि है। जवाहर लाल नेहरू ने जम्मू-कश्मीर के विषय को उलझा दिया था, यदि यह विषय सरदार वल्लभ भाई के हाथ में होता तो आज यह समस्या नहीं होती। उन्होंने कहा कि जिस विषय का समाधान सरदार पटेल के हाथों होना था, आज उसी विषय का समाधान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के हाथों हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सबका अपना राजनीतिक एजेंडा है। पीडीपी के लिए यह सत्ता पाने का माध्यम था। लेकिन हमारा मानना है कि जम्मू-कश्मीर की पूर्ण स्वायत्ता बिना हमारी आजादी अधूरी थी, जिसे पूरा करने के लिए हमारे जवानों, नेताओं और नागरिकों ने कुर्बानी दी है। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश सांसद इसके समर्थन में हैं, जो यह दर्शाने के लिए काफी है कि देश की जनता इस विषय का समाधान चाहती है।
जजपा का सरकार को समर्थन
जननायक जनता पार्टी ने जम्मू कश्मीर को लेकर केंद्र सरकार की ओर से लिए गए फैसलों का स्वागत किया है। पूर्व सांसद दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसके लिए केंद्र सरकार जो भी मजबूत कदम उठाना चाहे, वे उसका समर्थन करते हैं। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि भारत की एकता, अखंडता सर्वोपरि है और एक भारतीय होने के नाते वे इस मामले में देश की सरकार के साथ हैं।
दुष्यंत चौटाला ने ये भी कहा कि अनुच्छेद 370 और 35-ए को बहुत पहले खत्म कर देना चाहिए था। दुष्यंत ने ‘एक देश - एक संविधान’ का समर्थन करते हुए कहा कि यह कांग्रेस पार्टी की तुष्टिकरण की नीतियों का परिणाम है कि इतने लंबे समय तक कश्मीर को लेकर देश उलझन में रहा।
उन्होंने केंद्र सरकार का आह्वान किया कि लोगों ने उन्हें पूर्ण बहुमत दिया है इसलिए सरकार को लोगों की आकांक्षाओं पर खरा उतरना चाहिए। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि जम्मू कश्मीर में शांति बहाल रखने के लिए भारतीय सेना, स्थानीय पुलिस और प्रशासन की सराहना करते हैं और पूरा समर्थन देते हैं।
अब दो विधान, दो निशान, दो प्रधान की परंपरा खत्म : शर्मा
हरियाणा के संसदीय कार्य मंत्री रामबिलास शर्मा ने अनुच्छेद-370 को खत्म करने के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अब देश दो विधान, दो निशान और दो प्रधान की परंपरा खत्म हो गई है। यह फैसला पूरी दुनिया में भारत की मजबूती का संदेश देने वाला है। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक देशभक्त और स्वाभिमानी राष्ट्रवादी थे और उन्होंने भारत की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
डॉक्टर मुखर्जी अनुच्छेद 370 के मुखर विरोधी थे और वो चाहते थे कि कश्मीर पूरी तरह से भारत का हिस्सा बने और वहां अन्य राज्यों की तरह समान कानून लागू हो। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेहरू मंत्रिमंडल से उद्योग मंत्री का पद अपनी मांग पर अडिग रहते हुए ही छोड़ा था।
चंडीगढ़ में रह रहे कश्मीरी पंडितों ने हरियाणा मुख्यमंत्री का किया आभार व्यक्त
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का सोमवार को जम्मू एवं कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म करने के निर्णय पर चंडीगढ़ में रह रहे कश्मीरी पंडितों के कश्मीरी सहायक सभा के एक शिष्टमंडल ने विधानसभा कार्यालय में शिष्टाचार भेंट की और सरकार की राजनीतिक इच्छा शक्ति के लिए आभार व्यक्त किया। शिष्टमंडल में संजय रैना, केके कौल, राजेश पंडिता, फूला रैना शामिल थे। उन्होंने कहा कि यह कश्मीरी पंडितों के अधिकारों व मातृभूमि को सुरक्षित रखने के लिए लिया गया एक महत्वूपर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से आज हमारे लिए खुशी का दिन है।