मुक्केबाज विजेंदर सिंह की छुट्टी को लेकर हरियाणा पुलिस के अफसरों के सामने दिक्कत खड़ी हो गई है। छुट्टी में पेच फंसने का कारण खुद विजेंदर ही हैं। उन्होंने पेशेवर मुक्केबाजी के अपने करार की जानकारी पुलिस विभाग को नहीं दी थी।
हालांकि पिछले दिनों खेल मंत्री अनिल विज केसामने विजेंदर ने यह स्वीकार किया था कि पेशेवर मुक्केबाजी को लेकर उनका अभी तक करार हुआ नहीं है, होना है। वैसे विदेशी कंपनी के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि कर दी है। हरियाणा सरकार को भी अब इस बारे में जानकारी मिल गई है।
लिहाजा अब पूरा केस पुलिस विभाग की तरफ से राज्य सरकार को भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि विजेंदर की छुट्टी पर फैसला लेना सीएम के हाथ में ही है। पंजाब सिविल सेवा नियम के तहत, जो भी अधिकारी छुट्टी पर विदेश जाता है, उस दौरान वह कोई निजी काम नहीं कर सकता।
खास कर तब जबकि सक्षम अधिकारी या सीएम से पूर्व में स्वीकृति न ली गई हो। ऐसे में वजह साफ है कि विजेंदर ने न तो पुलिस विभाग को और न ही मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी दी थी। हालांकि मामले के तूल पकड़ने के बाद विजेंदर सिंह ने सरकार से सामने पेश होकर यह सफाई दी थी कि वह कोई भी करार सरकार की अनुमति के बिना नहीं करेंगे।
डीजीपी सीएम को भेजे पूरे मामले की रिपोर्ट
विजेंदर सिंह ने प्रार्थना पत्र में कहा है कि उसने कोई समझौता नहीं किया है। न ही किसी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। अब यह मामला सरकार के पास भेजेंगे। सरकार ही इस पर फैसला लेगी। - यशपाल सिंघल, डीजीपी, हरियाणा पुलिस।