हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर उस वक्त बड़ी हैरत में पड़ गए, जब उनके उपायुक्त उन्हें गलत जानकारी देकर गच्चा दे गए। उन्होंने उपायुक्तों के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग की और जमीनों की रजिस्ट्री से जुड़ी जानकारी मांगी, लेकिन उपायुक्तों ने उन्हें गलत जानकारी दी।
इससे खफा होकर मुख्यमंत्री ने आखिरकार संबंधित मंडल के आयुक्तों को उपायुक्तों की खिंचाई के निर्देश जारी कर दिए। आयुक्तों ने भी उपायुक्तों की बैठक बुलाकर उनसे जवाब तलब कर लिया है।
अब हालत यह है कि हरियाणा के सभी जिलों में डीसी इस समय देर रात तक अपने स्टाफ से मामले का हल ढूंढने के लिए कह रहे हैं।
उपायुक्तों ने खट्टर से यह झूठ बोला
उपायुक्तों ने कहा कि सभी जिलों में सारे इंतकाल दर्ज हो चुके हैं। जब सीएम ने जांच कराई तो 2000 से 27000 इंतकाल पेंडिंग मिले। सीएम खट्टर ने ऑनलाइन रजिस्ट्री लांच करने से पहले सभी जिलों में म्यूटेशन (इंतकाल) मंजूर करने के निर्देश दिए थे।
इनमें कहा गया था कि रुटीन में जितने भी इंतकाल हैं, वे समय रहते मंजूर हो जाने चाहिए। इस पर सभी जिला उपायुक्तों ने सीएम को यह जानकारी दी कि उनके यहां जीरो म्यूटेशन है यानी सभी इंतकाल दर्ज हो चुके हैं।
उपायुक्तों से यह जानकारी पाकर मुख्यमंत्री हैरत में पड़ गए। उन्होंने अपने स्तर पर इसकी जांच करवाई तो सामने आया कि किसी जिले में 2000 इंतकाल तो किसी में 27000 इंतकाल दर्ज होने बाकी हैं। इसके बाद उपायुक्तों से फिर पूछा गया तो उन्होंने तर्क दिया कि इंतकाल तो दर्ज तो हो चुके हैं, लेकिन कंप्यूटर में दर्ज नहीं हुए।
खट्टर ने सोमवार को उपायुक्तों को तलब किया
गुड़गांव के आयुक्त ने फरीदाबाद, गुड़गांव, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, मेवात और पलवल के उपायुक्तों को सोमवार को 11 बजे रिकॉर्ड के साथ तलब किया है। बैठक में जिला सूचना अधिकारी भी मौजूद रहेंगे और मौके पर रिकार्ड वेरिफाई किया जाएगा।
निजी बिल्डर को दी सरकारी जमीन
गुड़गांव में अधिकारियों ने मिलीभगत कर आठ एकड़ सरकारी जमीन किसी निजी बिल्डर को अलाट कर दी है। इस मामले में जब तक सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती तब तक संबंधित अधिकारी के काम पर पाबंदी लगा दी गई है और उसके खिलाफ पुलिस केस दर्ज करने के आदेश दे दिए गए हैं।