इसके बाद ये मुदद्दा आलाकमान तक भी पहुंच गया। जिसके बाद सीएम मनोहर लाल ने अनिल विज को बातचीत के लिए बुलाया। दोनों सचिवालय से एक ही वाहन में सीएम निवास गए। इस दौरान विज को सीएम ने साफ कर दिया था कि सीआईडी विभाग उनके पास नहीं है। इसके बाद सीआईडी ने भी विज को एक लाइन का जवाब भेजा कि उन्होंने विधानसभा चुनाव का हलका अनुसार विश्लेषण किया ही नहीं है।
तब तक विज के तेवर नरम पड़ चुके थे और इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। सीआईडी विभाग को सीएम के पास दिखाने पर भी विज ने कोई प्रतिक्रिया अभी तक नहीं दी है। 42 वर्ष पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री देवी लाल ने जनवरी, 1978 में जब भाजपा के वरिष्ठ नेता मंगल सेन को गृह मंत्री बनाया था, उसी समय सरकारी नोटिफिकेशन में स्पष्ट कर दिया था कि यह सीआईडी के बिना होगा। आज तक सीआईडी को सीएम अपने पास ही रखते आए हैं।
मुख्यमंत्री के पास विभाग
14 नवंबर 2019 को जारी गजट नोटिफिकेशन में मुख्यमंत्री के पास स्पष्ट तौर पर 12 विभाग वित्त, नगर तथा ग्राम आयोजन एवं शहरी संपदा, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, सिंचाई एवं जल संसाधन, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार, सूचना, लोक संपर्क एवं भाषा, आवास, योजना, न्याय प्रशासन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, वास्तुकला, सामान्य प्रशासन दर्शाए गए थे, साथ ही यह भी उल्लेख किया गया था कि अन्य विभाग जो किसी मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं, वे भी सीएम के पास रहेंगे। सीएम के पास सीआईडी विभाग, चुनाव संस्थागत वित्त एवं ऋण नियंत्रण, राजभवन मामले विभाग भी थे, जिन्हें अधिसूचना में नहीं दर्शाया गया था।
गृह मंत्री विज के पास ये विभाग
गृह, शहरी स्थानीय निकाय, स्वास्थ्य, तकनीकी शिक्षा, आयुष, मेडिकल शिक्षा व अनुसंधान, साइंस और टेक्नोलॉजी।