हरियाणा सरकार 50 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को बड़ी रियायत देने पर विचार कर रही है। गरीब परिवारों को राहत देने के लिए यह कदम उठाया जाएगा। सरकार जल्दी विद्युत नियामक आयोग से इस प्रस्ताव पर चर्चा करेगी। हालांकि, सरकार बिजली उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली देने के बिलकुल हक में नहीं है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शुक्रवार को ये बातें हरियाणा विद्युत नियामक आयोग की ओर से आयोजित विनियामक मंच (फोर्म ऑफ रेगुलेटर्स) की 83वीं बैठक में बतौर मुख्यातिथि कहीं। उन्होंने कहा कि कुछ प्रांतों में फ्री बिजली देने की शुरुआत हुई है, लेकिन हमने इस अवधारणा को नकारा है, क्योंकि फ्री इलेक्ट्रिसिटी इज नो इलेक्ट्रिसिटी। इससे न तो उपभोक्ताओं का भला होता है और न ही सरकार का। हरियाणा के लोगों ने भी इस बात को समझा है और वे सरकार का पूरा सहयोग कर रहे हैं।
उन्होंने अन्य राज्यों से आए हुए विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्षों व सदस्यों को बताया कि पिछले 8 वर्षों में हरियाणा ने बिजली के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है, जिसकी बदौलत आज हरियाणा बिजली के मामले में देशभर में अग्रणी राज्यों में शामिल है। कृषि क्षेत्र में पंजाब व हरियाणा में लगभग फ्री बिजली दी जा रही है। बैठक में अन्य प्रांतों की अच्छी पहल को जानने से बिजली क्षेत्र में और दक्षता सुनिश्चित होगी।
एक लाख सोलर कनेक्शन देने का लक्ष्य
सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 30 हजार सोलर कनेक्शन दिए जा चुके हैं। 50 हजार और सोलर कनेक्शन देने का काम चल रहा है। कुल 1 लाख सोलर कनेक्शन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसका प्रभाव यह हुआ कि जहां पहले बिजली पर कुल 7200 करोड़ रुपये सब्सिडी के रूप में दिए जाते थे, वहीं आज 5500 करोड़ रुपये सब्सिडी के रूप में दिए जा रहे हैं।
8 साल में बिजली दरें नहीं बढ़ाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि ने पिछले 8 सालों में बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की, बल्कि बिजली की दरों को घटाकर लोगों को राहत पहुंचाई है। एफएसए 37 पैसे था, जो हमने समाप्त कर दिया। इतना ही नहीं, बिजली की दर 150 यूनिट तक 4.50 रुपये प्रति यूनिट थी, जिसमें हमने कमी की और 200 यूनिट तक 2.50 रुपये प्रति यूनिट तथा 50 यूनिट तक मासिक बिजली खपत करने पर 2 रुपये प्रति यूनिट की दर निर्धारित की। वर्ष 2014 में राज्य में लाइन लॉस 29 प्रतिशत थे, जो आज घटकर 14 प्रतिशत पर आ गए हैं। इससे लगभग 6 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई है। हरियाणा के चारों बिजली निगम लाभांश की स्थिति में हैं। बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ढांचागत विकास पर भी काम किया है। प्रदेश के 80 प्रतिशत से अधिक गांवों में 24 घंटे बिजली मिल रही है।