हरियाणा के सात निकायों में से छह पर भाजपा का ट्रिपल इंजन मॉडल चला। भाजपा ने पकड़ मजबूत कर ली है। जहां विधानसभा चुनाव हारे थे, वहां भी भाजपा ने जीत दर्ज की है। कांग्रेस के गढ़ों में सेंध लगा दी है।
हरियाणा के सात निकायों में से छह पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जीत हासिल की है। इस जीत में चुनाव को लेकर पार्टी की गंभीरता, बूथ मैनेजमेंट और संवाद की अहम भूमिका रही है। इसके साथ ही जनता ने भी पार्टी के ट्रिपल इंजन सरकार की अवधारणा पर अपनी मुहर लगा दी है।
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साल 2024 के विधानसभा चुनाव में पंचकूला और अंबाला शहर में भाजपा के उम्मीदवारों को हार झेलनी पड़ी थी। अब उन्हीं शहरों में भाजपा ने अपने मेयर जिता दिए हैं। इससे माना जा रहा है कि कांग्रेस के विधायकों की पकड़ अपने इलाके में कमजोर पड़ी है और भाजपा का जीतना बताता है कि चुनाव हारने के बाद पार्टी इन क्षेत्रों में सक्रिय रही है।
इस जीत के साथ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का कद भी हाईकमान की नजरों में बढ़ा है। स्थानीय निकाय चुनावों को अक्सर छोटे स्तर पर होने वाला ऐसा चुनाव माना जाता है जो यह दिखाता है कि लोग राज्य और देश की राजनीति को किस तरह देख रहे हैं। इन चुनावों से यह भी पता चलता है कि सत्ताधारी पार्टी की जमीनी पकड़ कितनी मजबूत है।
धारूहेड़ा व सांपला में भाजपा की जीत के कई मायने
ऐसे में भाजपा की यह जीत सिर्फ सीटें जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी दिखाती है कि उसकी चुनावी तैयारी और रणनीति काफी मजबूत है। धारूहेड़ा व सांपला में भाजपा की जीत के कई मायने हैं। यह सीट भाजपा की पारंपरिक सीटें नहीं है। इस जीत से संकेत मिलते हैं कि पार्टी अब उन सीटों पर भी धीरे-धीरे मजबूत हो रही, जहां वह पिछले चुनावों में कमजोर रही है।
भाजपा की इस सफलता का एक बड़ा कारण यह माना जाता है कि वह हमेशा चुनावी तैयारी में लगी रहती है। पार्टी चुनाव को सिर्फ हार जीत तक सीमति नहीं है बल्कि वह इसे सतत चलने वाली प्रक्रिया मानकर जुटी रहती है।
इसमें संगठन को मजबूत करना, बूथ स्तर पर काम करना और लोगों से लगातार संपर्क बनाए रखना शामिल होता है। इसी वजह से लोकसभा, विधानसभा या निकाय चुनाव। हर जगह पार्टी पहले से ही पूरी तैयारी के साथ नजर आती है। हरियाणा के इस निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पूरी सरकार की सक्रिय भूमिका भी उल्लेखनीय रही।
राजनीतिक रूप से यह स्पष्ट दिखा कि भाजपा ने इस चुनाव को केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे राज्य सरकार की कार्यप्रणाली और नेतृत्व की विश्वसनीयता से जोड़ दिया। मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों तक, सभी नेताओं की सक्रिय भागीदारी ने चुनावी माहौल को पार्टी के पक्ष में संगठित करने का प्रयास किया। यह रणनीति यह संदेश देने की कोशिश थी कि सरकार और संगठन दोनों एकीकृत रूप से जनता के बीच मौजूद हैं।
हरियाणा के निकाय चुनाव को भले ही कांग्रेस ने इतनी गंभीरता से न लिया हो, मगर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और भाजपा शुरुआत से ही इसे अपनी साख से जोड़कर चल रही थी। इसलिए फिर चाहे मुख्यमंत्री हो या कैबिनेट मंत्री हर कोई चुनावी प्रचार में इतनी शिद्धत से जुड़ा कि जैसे ही वह खुद ही चुनाव लड़ रहा हो।
हुड्डा के गढ़ में भाजपा का जीतना
रोहतक की सांपला नगर पालिका पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ माना जाता है। इस क्षेत्र में भी भाजपा ने सेंध लगा दी है। यहां बीजेपी की जीत को विशेषज्ञ सिर्फ एक स्थानीय जीत नहीं मान रहे हैं, बल्कि इसे इस बात का संकेत मान रहे हैं कि कांग्रेस अपने पुराने मजबूत इलाकों में अब पहले जैसी पकड़ बनाए रखने में कमजोर पड़ रही है।