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हरियाणा : उद्यम एवं रोजगार नीति से पांच लाख को रोजगार देने का लक्ष्य, पढ़ें- कैबिनेट के अन्य फैसले

Thu, 24 Dec 2020 12:18 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सीएम मनोहर लाल (फाइल फोटो )
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हरियाणा सरकार ने नई उद्यम एवं रोजगार नीति के तहत एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश और पांच लाख रोजगार देने का लक्ष्य रखा है। हरियाणा उद्यम एवं रोजगार नीति, 2020 का फोकस मजबूत औद्योगिक विकास के बल पर लचीली अर्थव्यवस्था बनाने पर रहेगा।

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नीति में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में परिवर्तन से उत्पन्न होने वाले अवसरों का लाभ उठाने और राज्य में औद्योगिक विकास को आत्मनिर्भर भारत मिशन जैसी राष्ट्रीय पहल के साथ संरेखित करने की परिकल्पना की गई है। 


नीति में आपूर्ति श्रृंखला, विद्युत गतिशीलता, कृषि-तकनीक, ग्रीन मैन्यूफैक्चरिंग, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य एवं फार्मा और विकास के लिए अन्य नए अवसरों में उभरती प्रवृत्तियों का ध्यान रखा गया है। कैबिनेट में लिए गए निर्णय के मुताबिक यह नीति प्रदेश-भर में संतुलित क्षेत्रीय विकास की आवश्यकता पर बल देती है। 
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औद्योगिक विकास के आधार पर राज्य को चार श्रेणी में विभाजित किया गया है। ‘ए’ श्रेणी ब्लॉक में औद्योगिक रूप से विकसित क्षेत्र, ‘बी’ श्रेणी के ब्लॉक में मध्यवर्ती विकास के क्षेत्र जबकि ‘सी’ श्रेणी के ब्लॉक में औद्योगिक रूप से पिछड़े क्षेत्र शामिल हैं। इसी तरह, ‘डी’ श्रेणी के ब्लॉक में औद्योगिक रूप से अति पिछड़े क्षेत्र शामिल हैं।

इस नीति के तहत ऑटो, ऑटो कम्पोनेंट्स और लाइट इंजीनियरिंग, कृषि-आधारित, खाद्य प्रसंस्करण और संबद्ध उद्योग, कपड़ा और वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण (ईएसजीएम), प्रतिरक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण, फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरणों, रासायनिक और पेट्रोकेमिकल तथा लार्ज स्केल एनर्जी और डेट स्टोरेज पर विशेष बल दिया जाएगा।

सरकार ने हरियाणा विद्युत ठेकेदार लाइसेंस, योग्यता प्रमाण-पत्र तथा वायरमैन परमिट नियम, 2020 बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। नए संशोधनों के अनुसार, योग्यता प्रमाण पत्र और वायरमैन परमिट अनुभव के आधार पर प्रदान किए जाएंगे। जिसके लिए आवेदक को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन जमा करवाने की तिथि को आवेदक की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। आवेदक को योग्यता और अनुभव पूरा करना होगा, जिसकी जांच स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा की जाएगी।

ग्रुप हाउसिंग कॉलोनी के लिए न्यूनतम सीमा पांच से घटाकर चार एकड़ की
हरियाणा सरकार ने किफायती आवास नीति-2013 में संशोधन से संबंधित एक प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है, जिससे न्यूनतम क्षेत्र सीमा, परियोजना क्षेत्र सीमा और वाणिज्यिक घटक एवं पार्किंग प्रावधान में वृद्धि की जा सके। संशोधनों के अनुसार, किफायती आवास के तहत परियोजना की अधिकतम क्षेत्र सीमा 10 एकड़ से बढ़ाकर 30 एकड़ तक की गई है।

किफायती ग्रुप हाउसिंग कॉलोनी की स्थापना के लिए न्यूनतम क्षेत्र सीमा पांच एकड़ से घटाकर चार एकड़ कर दी गई है। हालांकि न्यूनतम क्षेत्र मानदंड पांच एकड़ से घटाकर चार एकड़ करने का प्रस्ताव किया गया है लेकिन फिर भी कॉलोनाइजर पांच एकड़ के लिए निर्धारित मानदंडों के अनुसार सामुदायिक भवन उपलब्ध करवाएगा।
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इसके अलावा जहां कॉलोनी की आबादी 10,000 से अधिक है, वहां नीति के अनुसार आंतरिक सामुदायिक भवनों के लिए निर्धारित मानदंडों के अनुसार सामुदायिक भवन उपलब्ध करवाए जाएंगे। संशोधन के अनुसार अब वाणिज्यिक क्षेत्र को कुल नियोजित क्षेत्र के चार प्रतिशत से बढ़ाकर आठ प्रतिशत किया गया है।

इसके अलावा किफायती ग्रुप हाउसिंग नीति में संशोधन किया जा रहा है कि 0.5 समतुल्य कार स्थान (ईसीएस) प्रदान करने का मौजूदा प्रावधान अनिवार्य और गैर-प्रभार्य बना रहेगा। कॉलोनाइजर को प्रति आवास इकाई के लिए अतिरिक्त 0.5 ईसीएस पार्किंग स्थान प्रदान करने की अनुमति दी जाएगी, जो वैकल्पिक होगी। जिसके समक्ष वह प्रत्येक आवास इकाई के लिए एक कार पार्किंग स्थान आवंटित कर सकता है। कॉलोनाइजर को कार पार्किंग स्थान के ऐसे आवंटन के समक्ष फ्लैट की लागत के पांच प्रतिशत से अधिक वसूलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

लाइसेंस के माइग्रेशन के संबंध में संशोधन 
सरकार ने लाइसेंस के माइग्रेशन के संबंध में संशोधन किया है। अब लाइसेंस के माइग्रेशन के मामले में कॉलोनाइजर को भुगतान की तारीख तक अर्जित ब्याज के साथ बकाया नवीकरण शुल्क का भुगतान करना होगा। हालांकि, माइग्रेशन के तहत क्षेत्र के लिए लाइसेंस शुल्क, राज्य अवसंरचना विकास शुल्क, कन्वर्जन चार्जेज और बाहरी विकास शुल्क, जिसमें भुगतान किया गया ब्याज भी शामिल है, को समायोजित किया जा सकता है। डेवलपर/कॉलोनाइजर मौजूदा लाइसेंस, जहां से वह माइग्रेट करना चाहता है, उस पर बाहरी विकास शुल्क और राज्य अवसंरचना विकास प्रभार पर बकाया ब्याज राशि जमा करवाने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।
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